संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वीरवार सुबह ठंड ने एक बार फिर अपना असर दिखाया। सुबह के समय सर्द हवाओं ने लोगों को कंपकंपाने पर मजबूर कर दिया, हालांकि करीब आठ बजे धूप निकलने के बाद ठंड से कुछ राहत मिली। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, जिससे मौसम में ठंडक बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में दिन और रात के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होने की संभावना है, जिससे ठंड का असर कम होगा।
मौजूदा ठंड गेहूं की फसल के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान गेहूं की बढ़वार के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस तापमान पर पौधे मजबूत बनते हैं, फुटाव बेहतर होता है और दानों का विकास तेज गति से होता है। ठंड के कारण मिट्टी में नमी बनी रहती है, जो जड़ों के विकास में सहायक होती है तथा मिट्टी के कटाव को भी रोकती है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार गेहूं की पैदावार अच्छी रहने की संभावना है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गेहूं की फसल के लिए जरूरी है ठंडा मौसम
कृषि विभाग के डॉक्टर सतीश नारा ने बताया कि शीत ऋतु का ठंडा मौसम गेहूं की फसल के लिए अत्यंत आवश्यक है। गेहूं की वृद्धि ठंड के मौसम में बेहतर होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि दूसरी सिंचाई के समय पर्याप्त मात्रा में पानी दें। उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल दो से तीन महीने बाद तना मजबूत और मोटा हो जाता है, जिससे वह अधिक पानी सहन करने में सक्षम हो जाती है। पर्याप्त सिंचाई और ठंडा मौसम पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। ठंडक बने रहने से पौधों का विकास तीव्र गति से होता है, जिससे अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ जाती है। मजबूत जड़ें ही बेहतर उत्पादन का आधार होती हैं और आने वाले समय में फसल की वृद्धि लगातार जारी रहेगी।