शीतलहर को प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पिछले सप्ताह से शीतलहर के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा है। तापमान कम होने के कारण पाला जमना भी शुरू हो गया है। शुक्रवार को सुबह चारे की फसल और सूखी घास पर हल्का पाला जमा दिखाई दिया। अधिकतम तापमान औसतन 10 डिग्री सेल्सियस रहा व न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह अब तक का सबसे कम तापमान है। हालांकि शुक्रवार को दिनभर धूप निकली रही, लेकिन 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली हवा ने लोगों को दिनभर घरों में बंद रखा।
करीब सप्ताह भर से ठंड में काफी वृद्धि हुई है। दो दिन पहले जहां अधिकतम तापमान औसतन 17 था, वह शुक्रवार को गिरकर 10 डिग्री पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान में भी काफी गिरावट आई है। धूप निकलने के बाद भी लोगों को ठंड से ज्यादा राहत नहीं मिली। सुबह शाम तो लोगों को बाजारों में अलाव सेंकते देखा गया। वहीं ठंड के चलते पार्कों में घूमने वालों की संख्या में भारी कमी आई है। बच्चे भी कम ही खेलते नजर आए। चिकित्सकों ने इस बढ़ी ठंड से विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। खासकर बुजुर्गों व बच्चों को गर्म वस्त्र पहनाकर सुबह शाम की ठंड से बचाने की सलाह दी है।
रबी की फसल के लिए फायदे की उम्मीद
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक रमेश वर्मा ने कहा कि पिछले सप्ताह से चल रही शीतलहर से आम जनजीवन जरूर प्रभावित हुआ है, लेकिन रबी की फसल में फायदा होने की उम्मीद है। आगामी समय में मौसम साफ रहेगा, लेकिन तापमान में गिरावट आ सकती है। रात के समय में पाला जमने लगा है। इससे सब्जियों की फसलों को नुकसान की संभावना है। अभी तक किसी भी फसल को किसी प्रकार का नुकसान नहीं है।