सीएमओ डॉक्टर शैलेंद्र ममगई शैली ने शनिवार को पूंडरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। यहां वे कर्मचारियों के ड्यूटी पर पहुंचने से पहले खुद पहुंच गए। इसके बाद कर्मचारियों को जैसे-कैसे सूचना मिली तो तुरंत अस्पताल पहुंचना शुरू हुए। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में सफाई को लेकर काफी अव्यवस्था दिखी। वहीं, कई कर्मचारियों के ड्यूटी पर देरी से पहुंचने का कारण जाना।
उन्होंने संबंधित अस्पताल में जिम्मेदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि इसके बाद अस्पताल में इस तरह की लापरवाही मिली तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सभी कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान वर्दी में होने की नसीहत दी। सीएमओ डॉ. शैलेंद्र ममगई शैली ने बताया कि वे सामान्य तौर पर स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करते रहते हैं। यहां पहुंचने का मुख्य उद्देश्य पूंडरी में तैयार हो रहे ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट का निरीक्षण करने का था। जिस पर तेजी से कार्य जारी है। यहां ऑक्सीजन प्लांट लगने से न केवल रोगियों के लिए ऑक्सीजन की कमी दूर होगी बल्कि निजी अस्पतालों के रिफिलिंग करने से सरकार और विभाग को आय भी होगी। उन्होंने कहा कि कैथल में कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। बच्चों के लिए 22 बेड तैयार है। इस मौके पर डॉ. महेश, सुविंद्र, जोगेंद्र फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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पर्ची कटवाने में बज जाते हैं बारह, नहीं हो पाता स्वास्थ्य परीक्षण
मैनुअली काम की रफ्तार धीमी, दस दिनों से ऑनलाइन सिस्टम बंद होने से भटक रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला अस्पताल में पिछले दस दिनों से ऑनलाइन कामकाज पूरी तरह से ठप है। पहले पर्ची कटवाने के लिए तीन-तीन घंटे लाइनों में लगना पड़ रहा है। इसके बाद जब पर्ची कट जाती है तब तक टेस्ट लैब में सैंपल लेने से मना किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सुबह नौ से 12 बजे तक ही हर प्रकार टेस्ट के लिए सैंपल लेने का समय निर्धारित किया गया है। यहां गायनी वार्ड, रक्त ओपीडी, एक्स-रे रूम, आपरेशन थियेटर कक्ष, एमरजेंसी वार्ड में ऑनलाइन कामकाज पूरी तरह से बंद हो रहा है। इससे मरीजों को पूरा-पूरा दिन इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि बीते दिनों सीएमओ द्वारा पंजीकरण रूम में मैनुअल कार्य के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की बात कही गई। लेकिन स्थिति अभी भी ज्यों कि त्यों है। शनिवार को सामान्य इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को इस तरह की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
जनरल वार्ड में नहीं ई-उपचार की सुविधा
अस्पताल में बने सामान्य बीमारी के इलाज के लिए जनरल वार्ड में ऑनलाइन सर्वर बंद होने से यहां काफी काम प्रभावित हो रहा है। यहां मैनुअली तरीके से काम किया जा रहा है। पहले डॉक्टर रजिस्टर में मरीजों का नाम व पता दर्ज करता है। इसके बाद ओपीडी स्लिप पर दवाईयां लिखता। इस पूरी प्रक्रिया में प्रति मरीज 15-20 मिनट का समय लगता है। सामान्य दिनों से जहां 70-80 मरीजों का इलाज होता था। अब 40-50 मरीजों का इलाज हो रहा है।
पंजीकरण कक्ष में नहीं है अतिरिक्त कर्मचारी-मरीजों को इलाज के लिए सबसे पहले पंज ीकरण करवाना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही आगामी प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन यहां कंप्यूटर की बजाय कर्मचारियों द्वारा हाथ से पर्चियां बनाई जा रही हैं। यहां पहले प्रति मरीज 10-15 सेकेंड का समय लगता था। अब यहां मरीजों को कई-कई घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ज्यादा दिक्कतें एमरजेंसी व गर्भवती ओर टेस्ट कराने वाले मरीजों को हो रही है। मरीज जब तक पर्ची कटवाने के लिए में लगते है तो तब तक टेस्ट करवाने का समय नहीं बचता।
अस्पताल में धीमी गति से कार्य होने के कारण मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही है। शनिवार को हालांकि मरीजों की संख्या कम रही। लेकिन कामकाज कछुआ चाल से ही जारी रहा। जो मरीज इलाज के लिए पहुंचे इनमें से अधिकतर बिना इलाज के लिए ही वापस घर लौटे।
थायराइड के इलाज के लिए पहुंची महिला ओमपति ने बताया कि वे सुबह आठ बजे इलाज के लिए जिला अस्पताल में पहुंची थी। यहां कई घंटे इंतजार के बाद पर्ची कटी। इसके बाद थायराइड टेस्ट नहीं हुआ। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई।
शहर वासी विक्रम ने बताया कि उनको तीन-चार दिन से बुखार आ रहा है। शनिवार को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। पहले पर्ची कटवाने के लिए लंबे समय तक लाइन में लगना पड़ा। अब यहां डॉक्टर से जांच करवाने के लिए भी काफी देर से इंतजार करना पड़ा है।