कैथल। महाभारतकालीन सूर्यकुंड तीर्थ के तालाब में नहरी पानी भरने के सीएम के ऐलान पर छह माह बाद तक किसी अधिकारी ने तीर्थ पर जाकर नहीं देखा। जिस कारण मजबूरन श्रद्धालुओं ने सीएम विंडो पर भी शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं। ना केवल सीएम की घोषणा को हल्के में लिया जा रहा है। बल्कि इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत हो रही हैं। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि यह कार्य कौन सा विभाग करेगा?
मुख्यमंत्री ने 28 मई को नई अनाज मंडी में आयोजित रैली में घोषणा की थी कि महाभारतकालीन ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के तीर्थ सूर्यकुंड में नहरी पानी भरा जाएगा। इसके लिए क्योड़क से पहले से ही वृद्ध केदार सरोवर में आ रही पाइपलाइन में से ही पानी लिया जा सकता है। रैली को हुए इस समय छह माह होने को हैं। लेकिन अभी तक किसी अधिकारी ने तीर्थ पर जाकर स्थिति का जायजा तक नहीं लिया है। योजना पर कितना खर्च आएगा, इसका एस्टीमेट तैयार होना तो अभी दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।
विभाग ही तय नहीं हो पाया अभी तक:
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि अभी तक तो यह भी तय नहीं हो पाया है कि इस परियोजना को कौन सा विभाग सिरे चढ़ाएगा? जिससे निकट भविष्य में भी अभी इस योजना पर काम शुरू होने की संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। नगर परिषद कैथल की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। सिंचाई विभाग, जनस्वास्थ्य, नगर परिषद सहित कई विभागों में इस संबंध में पत्राचार हो चुका है।
सीएम विंडो में भी दी है शिकायत:
तीर्थ से जुड़े श्रद्धालु रामपाल भट्ट ने इस संबंध में सीएम विंडो में आवेदन देकर गुहार लगाई है कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर शीघ्र काम हो। इसके बाद भी अभी तक किसी अधिकारी ने तीर्थ को लेकर किए गए ऐलान के बाद दौरा तक नहीं किया। जिस कारण सवाल उठता है कि कब इस परियोजना पर काम शुरू होगा। कब इसकी अनुमानित लागत तय होगी और कब श्रद्धालु यहां साफ पानी में पूजा-अर्चना व स्नान कर सकेंगे।
महाभारतकालीन ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व है तीर्थ का:
सूर्यकुंड मंदिर के महंत राजेश्वरपुरी जी महाराज ने बताया कि महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के मानसिक शांति के लिए यहां नवग्रह कुंड स्थापित करवाए थे। उनमें से एक सूर्यकुंड है। जिसमें कैथल सहित आस-पास के इलाकों का एकमात्र सूर्यदेव मंदिर है। यहां तीर्थ खाली पड़ा है। प्राचीन समय में पूरे कार्तिक माह में यहां श्रद्धालु स्नान करते थे। तीर्थ में स्नान करने से पुण्य मिलता है। इसके अलावा सूर्यकुंड में ऐतिहासिक मनकामेश्वर मंदिर, माता शीतला देवी मंदिर, काली माता मंदिर, माता मनसा देवी मंदिर भी स्थित हैं।
मुख्यमंत्री से मांग, दिया जाए ध्यान:
श्रद्धालु आशीष चौधरी सहित अन्य ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सीएम अनाउंसमेंट के तहत आने वाली इस परियोजना पर ध्यान दिया जाए। ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत ना हों। इस समय यह तीर्थ खाली पड़ा हुआ है। जिसके चलते यहां श्रद्धालु स्नान नहीं कर पा रहे हैं। ऐतिहासिक सूर्यकुंड तीर्थ में जल की आवश्यकता है। कार्तिक माह में यहां श्रद्धालु स्नान करते हैं। मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की थी। लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी यहां पानी कहां से आएगा? कैसे आएगा? इस संबंध में जानकारी लेने नहीं आया है। प्रशासन से अनुरोध है कि इस घोषणा को शीघ्र सिरे चढ़ाएं। ताकि तीर्थ में आने वाले श्रद्धालु यहां स्नान कर सकें।
राजेश्वरपुरी जी महाराज, महंत, सूर्यकुंड तीर्थ
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित योजनाओं में से अधिकतर पर काम शुरू हो गया है। मैं स्वयं अधिकारियों से मिलकर पता लगाऊंगा कि इस मामले में फाइल कहां अटकी है। शीघ्र यहां पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
राव सुरेंद्र सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता।
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सभी परियोजनाओं पर किसी न किसी स्तर पर काम चल रहा है। इस योजना पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिर भी पता लगाया जाएगा कि यह मामला कहां अटका है। जितनी जल्दी संभव होगा, तीर्थ में पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
डीसी, रविप्रकाश गुप्ता।