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Kaithal News: पहियों के निशानों से मिले थे सुराग

Thu, 21 Dec 2023 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कमल बहल
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कैथल। राजौंद में वर्ष 2011 में घर से बाहर बुलाकर युवक राज सिंह की हत्या के मामले में उसे उधारी वापस करने का झांसा देकर फोन कर घर से बाहर बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक, जब वह मोटरसाइकिल से बाहर आया तो उसे चार लोगों ने मौत के घाट उतार दिया। पुलिस को जांच में गाड़ी के पहियों के मिले निशानों से सुराग मिले थे। इस ब्लाइंड मर्डर का पुलिस ने चार दिन में खुलासा कर दिया था। हालांकि सभी आरोपियों को पकड़ने में उसे समय लगा गया।

पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर उत्तर प्रदेश के कैराना निवासी आशू को इस मामले में गिरफ्तार किया। इसके बाद पूछताछ में आरोपी आशू ने अपने साथियों भोला राम, नवाब व उस्मान के साथ मिलकर हत्या करने की बात कुबूल की थी। पुलिस के मुताबिक, राज सिंह के शव के पास मोटरसाइकिल की हालत से अंदाजा लगाया कि उसे जानबूझकर टक्कर मारी गई है। इसी आधार पर दर्ज हुए मामले में दर्ज पहलुओं के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
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अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश राजन वालिया की अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अन्य तीनों को अदालत ने भगोड़ा करार दिया था। बाद में राजौंद पुलिस ने उस्मान को 16 अगस्त 2017 को करनाल के असंध से गिरफ्तार किया। अगले दिन उसे 17 अगस्त को अदालत में पेश किया गया। राजौंद के तत्कालीन एसआई रामकिशन की अगुवाई में टीम को यह सफलता मिली थी। आरोपी को अदालत ने हत्या के मामले में 27 अगस्त 2011 को पीओ घोषित किया था। अदालत ने उस्मान उर्फ बबलू को 26 फरवरी 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले में अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायधीश विवेक नासीर की अदालत ने दोषी उस्मान कुरैशी को उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी।

मामला उधारी का था ः पुलिस ने 17 जून को आशू को गिरफ्तार कर वारदात में प्रयोग सरिया बरामद किया था। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि पशुओं का व्यापार करने वाले आरोपियों ने राजसिंह से 73 हजार रुपये नकदी उधार ली थी व उससे एक भैंस भी उधार ले गए थे।

राजसिंह जल्द रुपये देने की बात कहने लगा तो उनमें कहासुनी हो गई। इसके बाद आरोपियों ने हत्या की योजना बनाई व रात 11:30 बजे राजसिंह को फोन किया कि वे पिकअप गाड़ी से नकदी लौटाने आ रहे थे कि उनका वाहन बाबा मकदून पीर की मजार के पास खराब हो गया। राज को अपने पास बुलाया। आरोपियों ने राज सिंह को बहाने से टार्च की रोशनी में पिकअप गाड़ी को नीचे से देखने के लिए कहा तथा उसके झुकते ही रॉड से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। संवाद

सीन ऑफ क्राइम की जांच में हुआ था खुलासा

जब हत्या का केस दर्ज हुआ तो इन दोषियों की कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं थी। सीन ऑफ क्राइम की टीम की ओर से मोटरसाइकिल के क्षतिग्रस्त होने और गाड़ी के पहियों के निशान मिलने के साक्ष्य होने के चलते कार्रवाई शुरू की गई। मोबाइल कॉल डिटेल से मामले की परते खुलनी शुरू हुई और आशू की गिरफ्तारी के बाद मामला साफ हो गया था।
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पहले से थी पहचान

हत्या के इस मामले में राज सिंह की दोषियों से लंबे समय से जान पहचान थी। ये सभी आपस में पशुओं की खरीद-फरोख्त का व्यापार करते थे। पशुओं की खरीद-फरोख्त को लेकर दो लाख 30 हजार रुपये दोषियों को मृतक ने देने थे। इसी रंजिश के बीच दोषियों ने राज सिंह की हत्या कर दी थी। चार दोषियों में से तीन दोषी आपस में भाई-भाई हैं। दोषी आशु तो दोषियों का कारोबार में सहयोगी है। उस्मान, भोला और नवाब तीनाें भाई हैं।
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