हुडा सेक्टर-18 में मंगलवार को हुई युवक की दर्दनाक मौत के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं खुली है। सेक्टरवासी आज भी निकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों के घरों में गंदा पानी घुस रहा है। सेक्टरवासी कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन हर बार कोरे आश्वासन देकर उन्हें घर वापस भेज दिया जाता है। थोड़ी सी बरसात में लोगों के घरों मेें गंदा पानी जमा हो जात है, जिससे उनका घर से बाहर निकलना भी दुर्भर हो रहा है।
सेक्टरवासी मास्टर सतबीर गोयत, रणधीर सिंह, योगेंद्र शर्मा, ओमप्रकाश कुंडू, कपूर सिंह, मनीष गिड़ा, सुरेंद्र श्योकंद, नरेंद्र मोर व विजेंद्र मोर ने बताया कि व्यवस्था दुरुस्त न होने का खामियाजा हुडावासियों और सीवरेज सफाई कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है। जहां विषैली गैस के कारण मजदूर बेहोश हो रहे हैं, वहीं आसपास के क्षेत्र में रह रहे लोगों को भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हुडा निवासियों ने बताया कि सेक्टर में चार बड़े बोर हैं जिनका पानी भी नाले में ही जाता है, लेकिन बाहर निकासी सिर्फ एक ही इंजन से की जा रही है। जहां पानी की निकासी होना संभव नहीं है। मंगलवार को युवक जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया था, जहां उसकी मदद के लिए राहगीर सतीश ने अपनी कुर्बानी दे दी।
हुडा एक्सईएन धर्मबीर सिंह ने बताया कि सीवरेज को मेनलाइन से जोड़ने का काम हैवी क्रॉसिंग के कारण लंबित है। इसके लिए बी एंड आर को पत्र लिखा हुआ है। सीवरेज की लीकेज के कारण कईं बार समस्या आती है। जल्द से जल्द लाइन को जोड़कर लोगों को समस्या से निजात दिलाई जाएगी।
सेक्टरवासी बोले- खाली प्लाटों में करवाई जा रही गंदे पानी की निकासी
हुडा के अधिकारियों पर सीवरेज को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सेक्टर वर्ष 2000 में बना था। अब तक सीवरेज को मुख्य लाइन से नहीं जोड़ा गया है। सेक्टरवासी सीवरेज को मेनलाइन से जोड़ने की गुहार लगाते रहे हैं। इस पर ध्यान न देकर गंदे पानी की निकासी खाली प्लाटों में करवाई जा रही है। इससे सेक्टर में बदबू और मच्छरों की भरमार रहती है। गंदे पानी से लोगों में बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का बीमारियों से भरा पानी भी सेक्टर से निकलने वाली ड्रेन में डाला जाता है। सेक्टर के दोनों हिस्सों को जोडऩे के लिए इसी नाले पर एक कच्ची अस्थायी पुलिया बनाई गई है, जिस पर आए दिन दुर्घटना होती रहती हैं। सड़कों पर चारों तरफ बजरी बिखरी पड़ी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अनदेखी की जा रही है।