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जिला अस्पताल में एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाएं भर्ती

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city hospital - फोटो : Kaithal
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जिला अस्पताल में महिलाओं को कड़ाके की सर्दी में बेड की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाओं को रखा जा रहा है। जिसके कारण वे ना तो ढंग से लेट सकती हैं और ना ही ढंग से बैठ पाती हैं। अस्पताल प्रबंधन का एक ही जवाब है कि सर्दियों में मरीज ज्यादा आ जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने बेडों की डिमांड भेज दी है।
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मंगलवार को एक-एक बैड पर पड़ताल की गई तो एक बैड पर कैथल से काजल व सुनीता, दूसरे बैड पर मनदीप व पूजा, तीसरे बैड पर रचना व शीतल, चौथे बैड पर रचना व रीतू, एक अन्रू बैड पर वनीता एवं शालू लेटी हुई थीं। ॉयही हाल अंदर के वार्ड का मिला, जहां प्रसव के बाद महिलाओं को दाखिल किया जाता है। अंदर के वार्ड में एक बैड पर डोगरा गेट निवासी पूनम व उसी के साथ थाना गांव निवासी रेखा दाखिल है। उनके साथ उनके नवजात बच्चे भी हैं और तिमारदार भी। ऐसे में पूरी रात वे कैसे एक ही बैड पर गुजार रही हैं, यह सोचने का विषय है। महिलाओं का कहना है कि शुक्र है कि मौसम सर्दी का है और किसी तरह एक बेड पर अपनी - अपनी रजाई लेकर सो जाती हैं। गर्मी के मौसम में बीमारी फैलने का डर बना रहता है।
प्रसव पीड़ा में तड़पते हुए महिलाओं को नहीं मिल पा रहे बेड
आशा वर्कर ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि यहां वे सेंटरों से गर्भवती महिलाओं को लेकर आती हैं तो यहां इतनी अव्यवस्था है कि मरीजों की हालत ओर खराब हो जाती है। एक मरीज को वह लेकर आई थी गंभीर हालत में। लेकिन उसे दो-तीन घंटों तक बेड ही नहीं मिला। मुश्किल से उसने यह समय काटा। इसके बाद एक अन्य मरीज के साथ उसे दाखिल किया गया।
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हैडिंग
हर रोज होती है 25 से 30 डिलीवरी, तीन दिन तक दाखिल करना अनिवार्य
यहां हर रोज 25 से 30 डिलीवरी होती हैं। एक महिला को 48 घंटे तक दाखिल किया जाना अनिवार्य है। इस तरह से कम से कम 2 व 3 दिन एक महिला दाखिल रहती है। रोज यदि 30 महिलाओं की डिलीवरी होते तो यहां कम से कम 30 बेड और चाहिए। क्योंकि हर रोज इतनी ही मरीज नई आ जाती हैं। जबकि यहां 65 बेड हैं। उन्हीं बेडों को कंगारू केयर यूनिट, ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी सहित जच्चा - बच्चा से जुड़े सभी वार्डों में बांटा गया है। जिस कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
डिमांड नहीं हो रही पूरी
गायिनी वार्ड की ओर से कई बार बेडों की डिमांड विभाग को भेजी जा चुकी है। लेकिन इन महिलाओं की पीड़ा की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। अस्पताल के इंचार्ज डा. दिनेश कंसल ने कहा कि अक्तूबर से दिसंबर तक डिलीवरी की संख्या बढ़ जाती है। दूसरे जिलों से भी कई मरीज आते हैं। जिस कारण कुछ परेशानी है। प्रयास किया जा रहा है कि महिलाओं को कोई परेशानी ना हो।
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