नगर परिषद व डोर टू डोर एजेंसी के बीच चल रहे बिल को लेकर विवाद का सोमवार को भी कोई समाधान नहीं निकली सका। हालांकि शहर में अधिकतर जगहों से एजेंसी ने कचरा उठान का काम किया। कुछेक जगहों पर सुबह देर तक कचरा पड़ा हुआ दिखाई दिया। दूसरी ओर कर्मचारियों के दो गुटों ने अलग-अलग अधिकारियों को ज्ञापन देकर अपनी अपनी मांगें पूरी करने का आग्रह किया।
विदित रहे कि नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा एनजीटी के निर्देशानुसार काम न करने का कारण बताते हुए डोर टू डोर एजेंसी के तीन माह के बिल रोके हुए हैं। साथ ही नगर परिषद की ओर से टेंडर रद्द करने की शिकायत पर विभाग से मार्गदर्शन मांगा था, जिसके लिए स्थानीय स्तर के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि स्थानीय स्तर पर ही फैसला लिया जाए। उधर, ठेकेदार का कहना है कि तीन माह का बिल पास न होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को देने के लिए आगे फंड नहीं हैं। ठेकेदार के पक्ष के कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को डीसी से मिलकर ठेकेदार के बिल पास करने की मांग की। डीसी ने डीएमसी से बात करके समाधान के निर्देश जारी किए।
उधर, नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा की ब्लॉक कमेटी के बैनर तले कर्मचारियों ने डीसी, डीएमसी, ईओ को ज्ञापन भेजा। जिसमें मांग की कि रात्रि सफाई में लगे हुए सभी कर्मचारियों को 7 महीने का बकाया वेतन दिया जाए, डारे टू डोर के सभी कर्मचारियों को जुलाई माह का वेतन डीसी रेट के अनुसार व आठ माह का बकाया 30 लाख रुपये का ईपीएफ व ईएसआई का भुगतान किए जाने, एजेंसी के खिलाफ र्कावाई किए जाने, पे-रोल कर्मचारियों का बकाया देने, सभी कर्मचारियों को हर माह की सात तारीख से पहले वेतन देने, कच्चे व पक्के सहित ठेके के कर्मचारियों को 4 माह से डिटोल साबुन व अन्य सुविधाएं देने की मांग की।
ईओ रङ्क्षवद्र कुमार ने कहा कि डीएमसी महोदय के साथ विचार विमर्श करके डोर टू डोर की एजेंसी के काम के संबंध में फैसला लिया जाएगा। शहर से कचरे का उठान करवाया जा रहा है।