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सिटी-बैंकिंग स्क्वेयर : लटकी परियोजना और बढ़ रही लागत

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शहर की एक महत्वाकांक्षी सिटी एवं बैंकिंग स्क्वेयर परियोजना आपसी खींचतान और कानूनी दांव पेच में फंसकर पिछले सात साल से लटकी हुई है। नतीजतन न तो यह परियोजना अभी तक सिरे चढ़ी और न ही इसका लाभ जनता को मिला। बल्कि इस परियोजना की लागत साल-दर-साल बढ़ती महंगाई के चलते बढ़ती ही जा रही है। वर्ष 2015 में 32 करोड़ की अनुमानित लागत से तैयार हुई इस परियोजना का लागत बजट आज बढ़कर 54 करोड़ तक पहुंच चुका है। लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना पर काम आज भी बंद पड़ा है।
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पूर्व हुड्डा सरकार के दौरान पुराने बस अड्डे की जगह में तत्कालीन मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने सिटी व बैंकिंग स्क्वेयर बनाए जाने की प्लानिंग की थी। उन्होंने 2015 के विधानसभा चुनाव से पूर्व इसकी चहारदीवारी के निर्माण कार्य की नींव भी रख दी थी। इसके बाद भाजपा सत्ता में आई और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी शहर के हित को देखते हुए इस परियोजना को पूरा करने का एलान किया था। तमाम प्रयासों के बाद वर्ष 2018 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस परियोजना के लिए 32 करोड़ रुपये का टेंडर उस समय छोड़ा गया था।
लेकिन इसके बाद पार्षदों द्वारा की गई शिकायत के चलते तत्कालीन चेयरपर्सन सहित नगर परिषद के 11 अधिकारियों और कर्मचारियों सहित एजेंसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में विजिलेंस द्वारा केस दर्ज किया गया था। जिसकी जांच विजिलेंस अभी भी पेंडिंग हैं। नगर परिषद ने एजेंसी को अग्रिम भुगतान की गई 1.82 करोड़ रुपये की राशि भी बिल से काट ली थी। इसके बाद से ही प्रोजेक्ट लंबित पड़ा हुआ है।
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35 प्रतिशत काम हुआ पूरा
प्रोजेक्ट एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार इसका करीब 35 प्रतिशत बेसिक कार्य पूरा हुआ है। इसके बाद एजेंसी ने 6 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया। जिसे नगर परिषद अधिकारियों ने मार्गदर्शन के लिए आला अधिकारियों को भेजा। वहां से विजिलेंस से इस संबंध में पूछा गया, लेकिन अभी तक भुगतान के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। जिस कारण एजेंसी द्वारा करीब दो साल से काम भी बंद किया हुआ है। अब एजेंसी अपने भुगतान के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गई है। नगर परिषद के चेयरमैन रामनिवास मित्तल के कार्यकाल में यह प्रोजेक्ट प्लानिंग में आया था। इसके बाद यशपाल प्रजापति चेयरमैन बने। फिर डॉ. पवन थरेजा के हाथ में कमान आई और फिर सीमा कश्यप चेयरपर्सन बनीं, लेकिन प्रोजेक्ट अभी भी लटका हुआ है।
सभी बैंक एक जगह होने हैं शिफ्ट
सिटी स्क्वेयर में रमणीय स्थल बनने के साथ-साथ यहां बैंकिंग स्क्वेयर बनाया जाना है। इसके चलते शहर के सभी बैंक एक ही परिसर में आ जाएंगे। अभी शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों, अंबाला रोड, करनाल व ढांड रोड पर स्थित बैंकों के बाहर पार्किंग न होने के कारण वाहनों की भीड़ सड़कों को घेरे रहती है। जिससे इन इलाकों में जाम की भारी परेशानी से लोग जूझते रहते हैं। यह परियोजना सिरे चढ़ी तो निश्चित रूप से इस जाम से काफी हद तक मुक्ति मिलेगी। निर्माण एजेंसी के ठेकेदार शशांक ने कहा कि वे अधिकारियों से मिल चुके हैं। उनके 6 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया जा रहा। जिस राशि को लेकर शिकायत थी, वह भी 1.82 करोड़ रुपये काट ली गई है। 5 करोड़ रुपये सिक्योरिटी भी है। यदि कोई और कमी निकले तो उसमें से भी वसूली हो सकती है। लेकिन जो काम किया है, उसके 6 करोड़ रुपये का भुगतान तो किया जाए। इसके लिए विभाग के महानिदेशक की ओर से विजिलेंस को पत्र लिखा जा चुका है। उनके अनुसार 32 करोड़ रुपये में टेंडर लिया था, पिछले साल इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 54 करोड़ रुपये हो गई है। न ही बढ़ी हुई अनुमानित लागत की मंजूरी दी जा रही। जिसमें सरिया, सीमेंट व अन्य निर्माण सामग्री, सभी कीमतें 30 प्रतिशत बढ़ गई हैं। वे सभी संबंधितों अफसरों से मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक इस परियोजना की रफ्तार थमी हुई है।
उधर, पार्षद राकेश सरदाना का कहना है कि जिन लोगों ने गलत किया है, उनके खिलाफ जल्द जांच पूरी कर कार्रवाई की जाए। प्रोजेक्ट को अधूरा न छोड़ा जाए। इसे जल्द पूरा किया जाए। कुछ अधिकारियों और नेताओं की कारगुजारी का खामियाजा शहर क्यों भुगते? यदि काम शुरू नहीं किया गया तो जो अभी तक परियोजना के निर्माण में जो खर्च हुआ है, वह भी बर्बाद हो जाएगा। इसीलिए सरकार से मांग है कि इस प्रोजेक्ट के अधूरे पड़े काम को पूरा किया जाए, ताकि शहर की एक बड़ी परियोजना के लिए जाम आदि से मुक्ति मिले।
विजिलेंस जांच अभी जारी
विजिलेंस विंग प्रभारी सुरेश कुमार का कहना है कि डीएसपी करनाल द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है। करनाल में डीएसपी विजिलेंस सुनील कुमार के अनुसार मामला अभी विचाराधीन है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
मुख्यालय से मांगा है मार्गदर्शन
डीएमसी समवर्तक सिंह का कहना है कि भुगतान और संशोधित आकलन के लिए विभाग मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा है। जैसे ही निर्देश प्राप्त होंगे, उसी अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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