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बढ़े कलेक्टर रेट और आयकर विभाग ने प्रॉपर्टी खरीदारों की बढ़ाईं मुश्किलें

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circle rate - फोटो : Kaithal
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कैथल। शहर की आउटर कालोनियों में अधिक कलक्टर रेट और 10 लाख से अधिक की खरीद-फरोख्त चेक के माध्यम से करने के कारण प्रापर्टी के खरीदार और विक्रेता दोनों ही परेशान हैं। यहां की अधिकतर कालोनियों में मार्केट रेट 3 से 5 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से हैं। लेकिन कलक्टर रेट 6 से 8 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हैं। ऐसे में रजिस्ट्री करवाते समय लोगों को कलक्टर रेट के हिसाब से स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है। इस कारण उन्हें स्टांप ड्यूटी में दोगुना खर्च करना पड़ता है। किसी ने पांच लाख रुपये में प्लाट लेने का फैसला लिया है तो उसे खाते में कलक्टर रेट के कारण 7 से 8 लाख रुपये या कई जगहों पर 10 लाख रुपये तक की राशि रखते हुए चेक देना पड़ रहा है। ऐसा आयकर विभाग में रिपोर्ट दिए जाने के कारण किया जा रहा है। ऐसे में लोग प्रापर्टी खरीदने में भी हिचक रहे हैं। इन सभी परेशानियों के कारण प्रापर्टी के काम से जुड़े लोगों ने कलक्टर का रेट कम कराने की मांग की है।
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दस साल से लगातार बढ़ते जा रहे हैं कलक्टर रेट
प्रॉपर्टी के जानकार सुरेश कुमार, सुनील कुमार, सुभाष का कहना है कि कलक्टर रेट दस साल पहले काफी कम थे। इसके बाद से लगातार प्रॉपर्टी के रेट कम होते जा रहे हैं। लेकिन कलक्टर रेट बढ़ते गए और आज ये काफी अधिक हैं। दो साल से इनमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। जबकि इस समय मार्केट रेट के हिसाब से कलक्टर रेट कम होने चाहिए।
ये है शहर की कालोनियों में स्थिति
शहर 6 पट्टियों में बंटा हुआ है। पुरानी आबादी पट्टी कायस्थ सेठ में आती है। उसके बाद इसी पट्टी में अनेकों रिहायशी कालोनियां, पंत नगर, सावन विहार, डीएवी कालोनी आती हैं। जहां रेट तो हैं 3 से 4 हजार रुपये, लेकिन कलक्टर रेट 6 से लेकर 8 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तक हैं। इसी पट्टी में लिटिल फ्लॉवर स्कूल के पीछे का एरिया, मोती बाग, शुगर मिल के सामने तक की कालोनी पट्टी कायस्थ सेठ में है और यहां रेट 3 से 4 हजार रुपये हैं। लेकिन कलक्टर रेट 6 से 7 हजार रुपये के बीच में हैं।
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दूसरी पट्टी गादड़ में जनकपुरी, अंबेडकर नगर, मायामपुरी के साथ लगता एरिया, हरसौला बस्ती पर रेट 3 से 4 हजार रुपये मुख्य लोकेशनों को छोड़कर, लेकिन यहां कलक्टर रेट 6 से 8 हजार रुपये के बीच में हैं। शुगर मिल कालोनी में मार्केट रेट है 2 हजार रुपये। वहां कलक्टर रेट 6500 रुपये।
पट्टी गादड़ में ही देवीगढ़ पंचायत है। पंचायत की जमीन का शहर के हिसाब से कलक्टर रेट नहीं है। जिस कारण पंचायत और कालोनियों की जमीन को लेकर भ्रम रहता है। पट्टी चौधरी में कई ऐसी कालोनियां हैं, जिनके नाम ही नहीं हैं। पट्टी अफगान में कुछ क्षेत्र कमेटी तो कुछ कुछ एरिया पंचायत क्षेत्र में है।
पट्टी डोगर और पट्टी खोत दोनों का कुछ एरिया पंचायत तथा कुछ एरिया नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में है। यहां 3 से 4 हजार रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से रजिस्ट्री करवानी पड़ती है। जबकि 5 से 6 हजार रुपये के कलक्टर के हिसाब से हैं।
कई कालोनियों के नाम रिकार्ड में नहीं
ऐसी कालोनियों में आस-पास की कालोनियों के रेट के हिसाब से रजिस्ट्री में स्टांप ड्यूटी की जाती है। इतना ही नहीं
कलक्टर रेट और नगर परिषद एरिया की जो सूची है, उसमें काफी अंतर है। इस कारण एरिया को आगे - पीछे की कालोनी में जोड़कर रजिस्ट्री हो रहीं हैं। हैरानी की बात तो ये है कि शहर में कई कालोनियों में भूमि को सिंचित भूमि दिखाई गई है। जबकि वहां पूरी की पूरी कालोनियां आबाद हो चुकीं हैं।
कालोनाइजर मोहन लाल गुप्ता का कहना है कि हर व्यक्ति के पास इतनी राशि नहीं है कि वह हुडा में जमीन लेकर अपने घर बनाए। जो लोग 4 से 5 लाख रुपये तक जमीन लेकर घर बनाना चाहते हैं। दोनों तरह के रेट में अंतर होने के कारण लोग रजिस्ट्री कराने से बच रहे हैं। उनकी मांग है कि प्रशासन मार्केट रेट के हिसाब से सर्वे करवाकर कलक्टर रेट तय करे।
क्षेत्रीय विधायक लीला राम ने कहा कि इस बारे में अधिकारियों से बात करेंगे। यदि डीसी स्तर पर समाधान हुआ तो शासन स्तर पर इसका समाधान कराने के लिए बात करेंगे।
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