संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा प्रदेश में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का वेतन पिछले एक वर्ष से नियमित रूप से समय पर जारी नहीं हो पा रहा है। हर महीने की तरह इस बार भी दो से तीन महीने की देरी से वेतन मिलने की स्थिति बनी हुई है। वहीं परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव भी करीब पांच महीने से लंबित है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
सीएचओ का कहना है कि सरकार की ओर से विडयम ऐप सहित कई ऑनलाइन एप्लिकेशन के माध्यम से लोगों को दवाइयां उपलब्ध करवाने, मरीजों का रिकॉर्ड संधारित करने और फील्ड वर्क को पूरी तरह डिजिटल रूप में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स का कहना है कि उन्हें दवाइयां लिखने का अधिकार नहीं दिया गया है, इसके बावजूद ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन, रिपोर्ट अपलोडिंग और विभिन्न ऐप्स पर डेटा एंट्री का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे उनका कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।
इन्हीं समस्याओं को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने गत सोमवार से नई शैली अपनाते हुए ऑनलाइन हड़ताल शुरू की थी। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से विरोध इसलिए चुना है ताकि स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को प्रत्यक्ष रूप से किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े और जरूरी सेवाएं न्यूनतम स्तर पर जारी रह सकें।
सीएचओ का कहना है कि समय पर वेतन न मिलना और लगातार नए-नए ऐप्स का दबाव उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है। इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जिससे वे जनता तक अपनी सेवाएं सहज और प्रभावी रूप से नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर डा. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि वे जमीनी स्तर पर एचबी टेस्ट, बीपी जांच, शुगर जांच सहित घर-घर जाकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी निष्ठा से प्रदान कर रहे हैं, लेकिन अत्यधिक ऑनलाइन काम और उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर की तरह उपयोग किए जाने से उनका मनोबल लगातार गिर रहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार को ऑनलाइन हड़ताल का आठवां दिन रहा। इस दौरान टेली कंसल्टेंसी, एनएसएलडीए, यूविन, वैनस्लेंट्री सहित कई डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। सीएचओ ने मांग की है कि उनका वेतन और परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव समय पर जारी किया जाए, अनावश्यक एप आधारित कार्यभार को कम किया जाए।