संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के अभिभावकों को अब निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग जल्द ही बच्चों का गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू फिर से शुरू करने जा रहा है। यह आईसीयू सिर्फ एक महीने से अधिक आयु वाले उन बच्चों के लिए होगा, जिन्हें गंभीर बीमारी, तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या वेंटिलेशन जैसी विशेष चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होगी।
यहां बच्चों को इलाज के साथ अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आईसीयू को सक्रिय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही चालू कर दिया जाएगा।
आईसीयू में विशेष रूप से वेंटिलेशन सपोर्ट की जरूरत वाले बच्चों को भर्ती किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन छोटे बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों के ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। लंबे समय से गंभीर बीमार बच्चों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ रहा था, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले नागरिक अस्पताल में बच्चों का आईसीयू संचालित हो रहा था, लेकिन आवश्यक उपकरणों, सामग्री और मशीनरी की कमी के कारण इसे बंद करना पड़ा। तब से सभी गंभीर बाल रोगियों को निजी अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ रहा था। अब स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा आईसीयू को शुरू करने का निर्णय लिया है और तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
आईसीयू शुरू करने की तैयारियां जारी हैं। दवाइयां, बेड और अन्य उपकरण जुटाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले एक महीने में बच्चों का आईसीयू चालू हो जाएगा। इसके बाद गंभीर बीमार बच्चों का इलाज जिले में ही संभव होगा और अभिभावकों को निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- डॉ. दिनेश कंसल- प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर, जिला नागरिक अस्पताल
आईसीयू की मुख्य उपयोगिताएं
n
आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) गंभीर रूप से बीमार या चोटिल मरीजों को चौबीसों घंटे निगरानी, गहन देखभाल और उन्नत चिकित्सा उपचार प्रदान करता है। यह इकाई उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें जीवन-धमकाने वाली स्थितियों जैसे कि गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), दिल का दौरा, या बड़े ऑपरेशन के बाद तत्काल और लगातार चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। आईसीयू में लगे उन्नत उपकरण महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी करते हैं और जीवन-समर्थन प्रणालियाँ, जैसे वेंटिलेटर, प्रदान करते हैं, ताकि मरीजों को ठीक होने का सबसे अच्छा मौका मिल सके।