कैथल। अरस्तू ने कहा है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसके विपरीत आधुनिकता के इस युग में हम स्वास्थ्य के प्रति बेपरवाह हुए हैं। यही कारण है कि अनियमित जीवनशैली, खानपान और रहन-सहन विभिन्न बीमारियों की वजह बन रहा है। बड़ों में जहां डायबिटीज और हाइपरटेंशन की बीमारी आम है, वहीं बच्चे और युवा मोबाइल के अधिक प्रयोग का शिकार हो रहे हैं। खासतौर पर मोबाइल के अधिक प्रयोग से आंखों व कानों की बीमारियां बढ़ी है।
सामान्य अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, इस समय जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन आंखों की 100 व कानों की 50 से अधिक ओपीडी हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञों की मानें तो इनमें अधिकतर मामले मोबाइल के अधिक प्रयोग से होने वाली समस्याओं से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि पहले मोबाइल का प्रयोग कम होने के चलते यह ओपीडी भी कम होती थी।
जिला नागरिक अस्पताल के ऑडियोलॉजिस्ट एवं स्पीच थैरेपिस्ट डॉ. भुवन चावला ने बताया कि मोबाइल के अधिक प्रयोग के कारण जहां सुनने की समस्या बढ़ी है। वहीं, बच्चों में बोलने की समस्या भी आ चुकी है। ऐसे में वे कई बार अपना आपा खो देते हैं। अपने में ही अलग रहना शुरू कर देते हैं। इस समय सुनने से संबंधित बीमारी की करीब 50 ओपीडी रोजाना होती है। इसका बचाव हम बच्चों को इयरफोन और टीवी से दूर रखकर कर सकते हैं। ऐसा करने से ही हम अपने बच्चों को इन बीमारियों से बचा सकते हैं।
दूसरी ओर नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. कविता गोयल के अनुसार, मोबाइल का प्रयोग अधिक होने के कारण ओपीडी में लगातार इजाफा हो रहा है। अधिकतर लोगों को कम दिखने की समस्या रहती है। रोजाना 100 से अधिक मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें नजर की समस्या अधिक रहती है। खास बात यह है कि इसमें बच्चों की संख्या अधिक होती है।