संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पेरिस टोक्यो में आयोजित पैरा ओलंपिक तीरंदाजी मुकाबले में रिकर्व मैन ओपन में खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज खिलाड़ी हरविंद्र सिंह ने इतिहास रच दिया है। हरविंद्र ने पहले कांस्य और अब सोना जीता तो कैथल में उनके घर पर जश्न शुरू हो गया। हर ओर खुशी बिखर गई।
हरविंद्र सिंह ने फाइनल में सोने पर निशाना लगाया और विश्व मुकाबला जीता। साथ ही विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया है।
खिलाड़ी हरविंद्र सिंह की जीत के बाद परिजनों में खुशी का माहौल है। परिजन खुशी की सूचना मिलते ही ढोल की थाप पर थिरके। भारतीय कोच गौरव व दो बलवीर सिंह ने बताया कि पूरे मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज खिलाड़ी हरविंद्र सिंह ने बेहतर खेल प्रदर्शन दिखाया।
पहले ही दिन सभी मुकाबले हुए। उन्होंने टॉप 32 से खेलना शुरू किया था व जीत के साथ टॉप 16 में जगह बनाई। इसके बाद लगातार राउंड जीतने के बाद टॉप आठ में पहुंचे।
पहले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हरविंद्र ने इंडोनेशिया को हराया। उसके बाद कोलंबिया के खिलाड़ी हेक्टर जुलियो को 06-02 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है।
हरविंद्र ने पोलैंड के तीरंदाज लुकाज सीजैक को 6-0 को शिकस्त देकर इतिहास रच दिया। इससे पहले भारत का कोई भी तीरंदाज पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया है। ऐसी
उपलब्धि हासिल करने वाले हरविंद्र
पहले तीरंदाज बन गए हैं। सेमीफाइनल मुकाबले में हरिवंद्र ने ईरान के तीरंदाज मोहम्मद रिजा अरब अमेरी को कुल पांच सेट के मुकाबले में 7-3 के अंतर से शिकस्त दी।
हरविंद्र के पदक जीतने पर जिले में खुशी का माहौल है। देर रात को ही हरविंद्र के गांव अजितनगर में उनके घर पर बधाई देने वाले ग्रामीणों की भीड़ लग गई।
देर रात तक जागकर पिता परमजीत सिंह, पत्नी मनप्रीत कौर, दोस्त बलपीर सिंह सहित परिजनों ने भी हरविंद्र के मुकाबले देखे। फाइनल मुकाबले में हरविंद्र का हर तीर निशाने पर लगा। पोलैंड के तीरंदाज को वापसी करने का मौका ही नहीं मिला।
हरविंद्र के तीर कितने निशाने पर लग रहे थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल पांच सेट का मुकाबला तीन सेट में ही खत्म कर दिया। इस दौरान हरविंद्र ने पहला सेट 28-24 दूसरा 28-27 व तीसरा 29-25 से जीतकर ओवरआल 6-0 से शिकस्त दी।
इसी तरह सेमीफाइनल मुकाबले के पहले सेट में ईरान के तीरंदाज मोहम्मद रिजा अरब अमेरी ने स्टीक निशाना लगाकर हरविंद्र पर बढ़त बना थी। इस दौरान मोहम्मद ने यह सेट 26.25 के अंतर से जीत लिया। इसके बाद हरविंद्र ने करारा जवाब दिया और दूसरे सेट में 27.27 अंक लेकर बराबरी की।
तीसरे सेट में ईरान का तीरंदाज पिछड़ गया। हरविंद्र ने उसे 27.25 के अंतर से हराया। इसके बाद चौथे सेट में भी हरविंद्र ने 26.24 के अंतर से शिकस्त दी। पांचवें व निर्णायक सेट में भी में हरविंद्र मोहम्मद पर भारी पड़े। इस दौरान अचूक निशाना साधते हुए हरविंद्र ने 26.25 के अंतर से यह सेट जीत लिया और ओवरऑल 7.3 के अंतर से मोहम्मद को हरा दिया। बाद में जब उन्होंने पहला स्थान हासिल किया तो उनके समर्थक खुशी से झूम उठे।
एक ही दिन में जीते सारे निर्णायक मुकाबले
तीरंदाजी के पुरुष रिकर्व ओपन व्यक्तिगत के सारे निर्णायक मुकाबले एक ही दिन में हुए और सभी में हरविंद्र ने जीत दर्ज की। फाइनल व सेमीफाइनल से पहले एलिमिनेशन मुकाबले में चाइना के खिलाड़ी सेनलंग हुई को 7-3 से शिकस्त दी। इसके बाद एलिमिनेशन के दूसरे राउंड इंडोनेशिया के खिलाड़ी सेतियावान को 6-2 से क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद कोलंबिया के हैक्टर जूलियो रेमिरेंज को 6-2 के अंतर से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। ओर सेमीफाइनल में ईरान को 6-4 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
... लेकिन मिक्स टीम मुकाबलेे में चूके
मिक्स टीम मुकाबले खेलते हुए खिलाड़ी पूजा व हरविंद्र सिंह ने क्वार्टर फाइनल में पोलैंड को 6-2 से हरा दिया। इसके बाद दोनो खिलाड़ियों ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में यह जोड़ी इटली से 2-6 से हार गए। इसके बाद कांस्य पदक के लिए स्लोवेनिया टीम से मुकाबला हुआ। यह मैच दोनो टीमों के बीच टाई हो गया लेकिन टाई शॉट में खिलाड़ी हरविन्द्र सिंह व पूजा को स्लोवेनिया की टीम ने पराजित कर दिया।
पटियाला में अर्थशास्त्र विभाग से कर रहे पीएचडी
पेरिस पैरालंपिक में पुरुष रिकर्व के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतने वाले हरियाणा के 33 साल के तीरंदाज हरविंदर सिंह अर्थशास्त्र विभाग से वह पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए अपने जीवन में काफी संघर्ष व चुनौतियों का सामना किया है। 25 फरवरी 1991 को हरियाणा के जिला कैथल के अजीत नगर में जन्मे हरविंदर सिंह के पैरों ने मात्र डेढ़ साल की आयु में ही काम करना बंद कर दिया था। दरअसल उन्हें डेंगू हो गया था और इलाज के दौरान लगाए इंजेक्शनों के कुप्रभाव से उनके दोनों पैरों ने अपनी गतिशीलता खो दी थी। लेकिन इस बड़े झटके के बावजूद हरविंदर सिंह ने हौसला नहीं खोया। 2012 लंदन पैरालंपिक से प्रेरणा लेकर हरविंदर सिंह में तीरंदाजी का जुनून पैदा हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कोरोना काल में ट्रेनिंग के लिए पिता ने खेत को ही आर्चरी रेंज में बदल दिया था
2017 में पैरा आर्चरी वर्ल्ड चैंपियनशिप से उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत की। इस मुकाबले में वह सातवें स्थान पर रहे थे, लेकिन अगले ही साल 2018 में जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में हरविंदर सिंह ने गोल्ड मेडल जीता। कोरोना काल के दौरान बेटे की ट्रेनिंग प्रभावित न हो, इसलिए पिता ने हरविंदर सिंह के लिए अपने खेत को ही आर्चरी रेंज में तबदील कर दिया था। तीन साल पहले हरविंदर ने टोक्यो पैरालंपिक में भारत के लिए तीरंदाजी में पहला पदक हासिल करके इतिहास रचा था। हरविंदर सिंह ने कांस्य पदक प्राप्त किया था।
बचपन में गंवाई बाई टांग फिर भी नहीं मानी हार
अजितनगर गांव के रहने वाले हरविंद्र ने बचपन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जब वह मात्र डेढ़ साल के थे तो बुखार होने पर एक झोलाछाप ने उन्हें इंजेक्शन लगाया। घर वालों के मुताबिबक, इसी वजह से वह पैरालाइज हो गए और बाईं टांग में दिक्कत हो गई। बावजूद इसके हरविंद्र सिंह ने कभी हार नहीं मानी। पटियाला यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी में में उसे आर्चरी का शौक पैदा हुआ और टीवी पर पैरालंपिक का मैच देखते हुए ठान लिया था कि एक दिन वह भी देश के लिए तीरंदाजी में गोल्ड मेडल लेकर आएंगे।