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कहीं रद्द न हो जाएं जिले की छह परियोजनाएं

Mon, 12 Sep 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो कैथल
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अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा अलग-अलग रैलियों में घोषित किए गए जिले के 6 बड़े प्रोजेक्ट रद्द हो सकते हैं। कहीं जमीन तो कहीं अन्य नियमों के चलते ये प्रोजेक्ट्स अभी तक नॉट फिजिबल (संभव नहीं) की श्रेणी में हैं। जिस कारण जिले के लोग इन परियोजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
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मुख्यमंत्री ने अब तक जिले में कुल 87 परियोजनाओं की घोषणाएं की हैं। जिनमें से 8 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं। लेकिन पूंडरी हलका के लिए घोषित 5 बड़ी परियोजनाएं नॉट फिजिबल पाई गई हैं। वहीं सीवन में भी पार्क की परियोजना को विभाग ने नकार दिया है।

इन घोषणाओं को किया गया नॉट फिजिबल घोषित
1. पूंडरी में हुडा सेक्टर : कंट्रोल्ड एरिया फाइनल ना होने के कारण।
2. टीक, ढीग, रसीना व करोड़ा में अनाज मंडी के लिए सब यार्ड : विभाग के तय नियमों के अनुसार कम से कम 35000 हजार एमटी अनाज ना पहुंचने के चलते इसे नॉट फिजिबल की श्रेणी में रखा गया है।
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3. सीवन में पार्क का निर्माण : सीवन में पहले से ही वन विभाग द्वारा हर्बल पार्क बनाया हुआ है। इसलिए पार्क की घोषणा भी नॉट फिजिबल पाई गई है।
4. फतेहपुर में हर्बल पार्क का निर्माण : जमीन ना मिलने के कारण इस पार्क को भी नॉट फिजिबल की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।
5. धेरड़ू में नर्सिंग कॉलेज : धेरड़ू में नर्सिंग कॉलेज भी नॉट फिजिबल पाया गया है। नियमानुसार नर्सिंग कॉलेज खोलने से पहले अस्पताल चलाया जाना अनिवार्य है। इस कारण यहां नर्सिंग कॉलेज नहीं बन सकता।
6. पूंडरी में 50 बेड से 100 बेड तक अस्पताल : पूंडरी में 50 बेड के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर को 100 बेड का बनाए जाने से भी लगभग इंकार हो गया है। इसके लिए भी जगह ना मिलने के कारण प्रोजेक्ट को नॉट फिजिबल की श्रेणी में रखा गया है।

लोगों को होगा नुकसान
पूंडरी शहर में अस्पताल बदहाल स्थिति में है। यहां चिकित्सकीय सुविधाएं ना के बराबर हैं। 100 बेड का अस्पताल बनने की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी। लेकिन अब अस्पताल के ना बनने पर लोगों को ज्यादा परेशानियां होंगी। वहीं लोग निराश होंगे।
वहीं पूंडरी में सेक्टर की जरूरत थी। अब सेक्टर ना बनने के कारण लोग निराश हैं। क्योंकि जो इस समय सेक्टर है, वह अनाज मंडी के निकट है। वहां हर समय धूल का साम्राज्य रहता है।

ऐसे आती हैं नॉट फिजिबल श्रेणी में
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद संबंधित विभाग के माध्यम से एडीसी कार्यालय द्वारा आवश्यक जानकारी जुटाई जाती है। जिसमें कई जगह जमीन ना मिलने, सरकार के नियमों के चलते योजना को पूरा न करने जैसी जानकारी जुटाकर सीएम कार्यालय को अवगत करवाया जाता है। सीएम कार्यालय द्वारा ही नॉट फिजिबल की श्रेणी में संबंधित परियोजना को डाल दिया जाता है। ऐसा नहीं हैं कि एक बार नॉट फिजिबल में आ जाएं तो उसे फिर से पूरा न किया जाए। यदि उस परियोजना के संबंध में आई अड़चन बाद में दूर हो जाए तो वह फिजिबल हो सकती है और उस पर काम हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि एक समय में परियोजना के लिए जमीन नहीं मिल रही है और बाद में उसके लिए जमीन मिल जाए तो वह फिजिबल हो जाती है।

जिस भी परियोजना के संबंध में कोई खामी आई होगी, उसे सीएम कार्यालय को भेज दिया गया था। वहीं से नॉट फिजिबल का फैसला होता है। कार्यालय समय में ही बताया जा सकता है कि कौन सी परियोजना इस श्रेणी में आई है।
कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, कैथल।

पता चला है कि सीएम द्वारा घोषित कई परियोजनाओं को नॉट फिजिबल की श्रेणी में डाला गया है। लेकिन अस्पताल, सेक्टर व हर्बल पार्क जैसी परियोजनाओं के लिए प्रयास किया जा रहा है। जगह मिलने पर इन्हें पूरा करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री से मिलकर इस संबंध में बात करेंगे।
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प्रो. दिनेश कौशिक, विधायक, पूंडरी।

अभी मुझे याद नहीं है कि कौन सा प्रोजेक्ट नॉट फिजिबल है और कौन सा नहीं। कार्यालय समय में पता करके ही कुछ बताया जा सकता है।
रविप्रकाश गुप्ता, डीसी, कैथल।
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