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14 नगर पार्षदों ने की सामूहिक इस्तीफे की पेशकश

Sun, 11 Sep 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो कैथल
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पंचायत का आयोजन कर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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तालाबों के नाम पर कलायत में मकानों को गिराने के मामले को लेकर सभी नगर पार्षदों ने सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने की पेशकश की है। पार्षदों ने कहा कि यदि सरकार लोगों के साथ ज्यादती करेगी तो वे अपना पद छोड़कर जनता के संघर्ष में शामिल होंगे। लोगों के घर गिरवाए जाने के विरोध में शनिवार को लोगों की पंचायत का आयोजन कर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया और वर्ष 2008 से पूर्व की कागजों में जमीन की स्थिति को बहाल करने की मांग की गई।
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शुक्रवार को भवन गिरवाए जाने के विरोध में शनिवार को बड़ी चौपाल में एक महापंचायत हुई। महापंचायत में कलायत सहित सहारण खाप के सभी गांवों में प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महापंचायत में सभी लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे। सहारण खाप के प्रधान रामपाल सहारण ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी द्वारा की गई गलती का खामियाजा लोग क्यों भुगतें। ये लोग जिन मकानों में रह रहे हैं वे मकान आज नहीं बने बल्कि आठ दशक पुराने हैं। दादा परदादाओं द्वारा बनाये गए मकान आज अवैध कैसे हो गए यह बात प्रशासन को समझ नहीं आती। कामरेड साधू राम ने कहा कि तत्कालीन उपायुक्त चंद्रशेखर ने बिना मामले को समझे ही आनन-फानन में लोगों की मलकीयत को बदल दिया जिससे लोगों की अपनी जमीन के रजिस्ट्री व इंतकाल तक रद्द कर दिए गए। न्यायालय में भी अधिकारियों व कर्मचारियों ने जो दस्तावेज पेश किए वे सही नहीं बल्कि लोगों के साथ किया गया धोखा था। जिस भूमि पर बसासत थी उसे खाली तालाब दिखा दिया गया। महापंचायत में यह निर्णय भी लिया गया कि सभी खाप प्रतिनिधि व कलायत के पीड़ित लोग उपायुक्त से मिलें। महापंचायत में मामले को लेकर 11 सदस्यीय कमेटी बनाई गई जो पूरे मामले को लेकर उपायुक्त से मिले पर डीसी के कैथल में न होने के कारण रविवार तक के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। रविवार को सभी प्रतिनिधि व कलायत के पीड़ित उपायुक्त से मिल कर अपना पक्ष रखेंगे। महापंचायत में मेघ सिंह राणा, लीलू राम राणा, कामरेड साधू राम, रामपाल सहारण, गुरुनाम सिंह, मैनपाल, समे सिंह मालदा, जसवंत भगत, बिट्टू राणा व मन्नू कपूर ने भी अपने विचार रखे।

उधर, पार्षद राजू कौशिक ने कहा कि वर्ष 2008 में कलायत की नगर पालिका में ही बैठ कर बसे हुई आबादी को जोहड़ दिखा दिया गया। वर्ष 2008 में स्थिति यह थी की जिस स्थान को खाली जोहड़ दिखा कर न्यायालय को गुमराह किया गया। वहां 80 प्रतिशत की आबादी अपने मकानों में जीवन बसर कर रही थी। उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन नगरपालिका प्रशासन ने उन स्थानों को खाली जोहड़ दिखाया था तो वहां बसे लोगों से हाउस टैक्स व मकान के नक्शे पास करने की फीस कैसे ली। पार्षदों का कहना था कि उन पर आज अंगुलियां उठ रही हैं कि उनके इशारे पर यह कार्रवाई हो रही है जबकि गलती 2008 में हुई है। उनका कहना था कि यदि प्रशासन ऐसा नहीं करता है तो सभी लोग सामूहिक तौर पर अपने इस्तीफे दे देंगे।
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13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
नगर के सजूमा रोड पर मकानों को गिराने के दौरान भड़की हिंसा और पथराव के मामले में कलायत पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। बता दें कि गत दिवस नगर के सजूमा रोड पर खसरा नंबर 482 में जिस समय प्रशासन ने मकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू की तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और माहौल गर्मा गया। दोनों ओर से हुए भारी पथराव के साथ-साथ पुलिस ने आंसू गैस व फायरिंग भी की। पथराव में चार पुलिसकर्मियों सहित अनेक लोग घायल हो गए थे। थाना प्रभारी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनवाई गई है तथा हिंसा को फैलाने वाले दोषियों की पहचान करके उनके खिलाफ भादंस की धारा 148, 149, 186, 332, 353 और 427 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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