संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सर्दी के मौसम में निमोनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता एवं बचाव अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत आशा वर्करों की टीमें गठित कर दी गई हैं, जो घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में जिले में 280 बच्चे सामान्य निमोनिया से और 46 बच्चे गंभीर निमोनिया से ग्रस्त पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 37,500 बच्चों की स्क्रीनिंग की है। राहत की बात यह है कि पिछले एक वर्ष में जिले में किसी भी बच्चे की निमोनिया से मृत्यु नहीं हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में निमोनिया के 30 प्रतिशत से अधिक केस सामने आते हैं। ठंडी हवाएं, तापमान में गिरावट और कमजोर इम्यूनिटी इस संक्रमण के प्रमुख कारण हैं। बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी इसकी चपेट में आते हैं।
निमोनिया के लक्षण निम्न हैं ः- तेज बुखार, खांसी के साथ पीला, हरा या खूनी बलगम, थकान और कमजोरी, तेज सांस चलना या धड़कन बढ़ना, सांस लेने या खांसी के समय छाती में दर्द, पसीना आना या ठंड लगना, भूख न लगना, होंठ या नाखून का नीला पड़ना, भ्रम या कंफ्यूजन की स्थिति आदि।
28 फरवरी तक चलेगा अभियान
जिले में निमोनिया से बचाव के लिए विशेष अभियान 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। इस दौरान आशा वर्कर घर-घर जाकर 5 वर्ष तक के बच्चों की जांच करेंगी। साथ ही पीसीवी टीकाकरण से वंचित बच्चों की सूची तैयार कर उनका टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में सावधानी और समय पर जांच से निमोनिया पर नियंत्रण संभव है। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, कैथल