संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। जय मां बाहरवाली रंगमंच क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार रात भगवान श्रीराम के वनवास के बाद राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का मार्मिक प्रसंग मंचित किया गया। श्रीराम के वन जाने के बाद दशरथ की व्याकुलता और पुत्र के प्रति उनका प्रेम कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।
दशरथ बार-बार श्रीराम को याद करते हुए उन्हें पुकारते रहे। अंत में ‘हे राम’ कहते हुए उन्होंने प्राण त्याग दिए। इस दृश्य को देखकर रामलीला मैदान में मौजूद दर्शक भावुक हो गए और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। रामलीला के मंचन में कलाकारों ने संवाद और अभिनय के माध्यम से राजा दशरथ की पीड़ा को जीवंत किया। श्रीराम के वनवास के बाद दशरथ का अपने पुत्र को याद करना, उनकी व्याकुलता और बार-बार राम को पुकारने के दृश्यों ने माहौल को भावुक बना दिया। कलाकारों के सशक्त अभिनय के दौरान रामलीला मैदान में मौजूद दर्शक पूरी तरह मंचन से जुड़े नजर आए। प्रसंग के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
राम की भूमिका बिट्टू सैनी, लक्ष्मण की भूमिका सुनील सैनी, सीता की भूमिका प्रदीप सैनी तथा राजा दशरथ की भूमिका शिवलाल सैनी ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों के अनुरूप संवाद और अभिनय प्रस्तुत किया। विशेष रूप से दशरथ के पुत्र वियोग के प्रसंग को दर्शकों ने भावुक कर देने वाला बताया। इस अवसर पर जगदीश सैनी, सुरेश सैनी, राजीव सैनी, रामप्रकाश सैनी, पाला राम, भान सैनी, रवि सैनी, सुनील सैनी, बंटी बहल, संजू सैनी सहित क्लब के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। क्लब सदस्यों ने रामलीला में पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।