कलायत। कलायत अनाज मंडी में जहां खरीद एजेंसियां केवल तय मानकों पर ही धान खरीदने का दावा कर रही हैं। वहीं किसान एमएसपी से कम दाम मिलने और खरीद प्रक्रिया में मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन की जिला टीम ने शनिवार को कलायत अनाज मंडी का दौरा कर धान की खरीद व सुविधाओं का निरीक्षण किया और एजेंसियों पर धान खरीद में अनदेखी और मनमानी करने का आरोप लगाया
इस अवसर पर किसान नेता सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि कलायत अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद सुचारु ढंग से नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि अभी तक मंडियों में जो धान आ रहा है उसका केवल 25 प्रतिशत ही सरकारी एजेंसी की ओर से खरीदा जा रहा है। बाकी धान को प्राइवेट सेलर वाले लगभग 250 से लेकर 350 रुपये तक का कट लगाकर खरीद रहे हैं। खरीद एजेंसी सीएमएस के परचेजर करण सिंह के अनुसार मंडी में खरीद पूरी तरह से एमएसपी पर की जा रही है, लेकिन 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आवक में से लगभग 1500 क्विंटल धान ही 17 फीसदी नमी के मानक पर पास हुआ है और शेष धान में नमी ज्यादा होने के कारण किसानों को फसल सुखाकर व साफ करके लाने की सलाह दी गई है। कम दामों में खरीद की खबरों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मानकों को पूरा करने वाले हर दाने को तय सरकारी रेट पर ही खरीदा जाएगा। मौके पर मौजूद किसान नेता सतपाल दिल्लोंवाली, सुभाष बढसीकरी, चांदी सहारण और रामेश्वर खटकड़ आदी का कहना है कि 29 सितंबर से खरीद केवल कागजों में चल रही है। किसान नेताओं का आरोप है कि 1000 क्विंटल में से महज 160 क्विंटल की ही बोली लग पा रही है और मंडी में एक ही एजेंसी होने से मनमानी बढ़ गई है। जिससे किसानों को 1800 से 2250 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गेट पास और पोर्टल भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। जिन किसानों ने पंजीकरण कराया हुआ है कंप्यूटर उसको कम दिखाकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। सरकार ने जो 27 क्विंटल प्रति एकड़ की कंडीशन लगाई है यह वापस ले। क्योंकि जो धान के हाइब्रिड बीज है वे 35 क्विंटल से लेकर 40 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से निकलते है। किसानों ने अपनी समस्याओं के संबंध में प्रशासन के सामने 6 प्रमुख मांगे रखी हैं। जिनमें नमी का मानक 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत करना, प्रति एकड़ खरीद सीमा 27 से बढ़ाकर 40 क्विंटल करना, गेट पास की कटौती बंद करना, राइस मिलरों का जल्द पंजीकरण, मंडी में 2-3 अन्य खरीद एजेंसियां तैनात करना और पूरे हरियाणा में कहीं भी फसल बेचने की छूट देना।