कलायत क्षेत्र में निकासी संसाधनों की बदहाल स्थिति
कलायत। प्रदेश सरकार की ओर से मानसून को देखते हुए बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के आदेशों के बेअसर होने से प्रशासनिक दावों और लाखों रुपये के खर्च के बावजूद शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि हल्की बारिश भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। भारी बरसात की स्थिति में जलभराव का संकट और गहरा सकता है।
शहर के लोगों का कहना है कि कलायत नगर पालिका ने शहर की एकमात्र प्रमुख कपिल मुनि ड्रेन की सफाई का दावा करते हुए लाखों रुपये का टेंडर जारी किया था लेकिन ड्रेन के तटबंधों, तलहटी और कई अन्य हिस्सों में झाड़ियां, गाद और कचरा जमा है। समय पर सफाई नहीं होने से खेतों में पानी भरने की आशंका बढ़ती नजर आ रही है। किसान लगातार विभाग से सफाई कराने की मांग कर रहे हैं। बाढ़ प्रबंधन केवल निकासी संसाधनों के थोड़े बहुत भाग तक सीमित है। शहर में गलियों के निर्माण व रिपेयर के नाम पर सीवरेज मेनहोलों के ढक्कन टूटे हैं।
पार्षदों व शहर के लोगों की ओर से बार-बार इस समस्या के निवारण की मांग उठाई जा रही है। यदि जल्द मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो हालात बदतर होंगे। गांवों में निकासी नालों का रखरखाव व कृषि भूमि को जलभराव से बचाने के लिए समन्वित योजना पर काम करना आवश्यक है। क्षेत्र पहले भी जलभराव की गंभीर समस्या झेल चुका है। वर्ष 1995 से लेकर अब तक कई बार बाढ़ और भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। हर वर्ष सामान्य बारिश के दौरान भी शहर की सड़कों, बाजारों, रिहायशी इलाकों और खेतों में पानी भर जाता है। इससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
खामियां व कमियों को करवाया जा रहा दूर : एसडीएम
कलायत एसडीएम अजय हुड्डा ने बताया कि लगातार अधिकारियों को बाढ़ प्रबंधन के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके तहत नगर पालिका, सिंचाई, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व अन्य संबंधित विभागों को समुचित रूप से सफाई कार्य करना है। धरातल पर स्थिति को जांचने के लिए वे खुद स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। जो कमियां और खामियां सामने आई उन्हें दूर करने के सख्त निर्देश हैं।
कलायत क्षेत्र में निकासी संसाधनों की बदहाल स्थिति