संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शिक्षा विभाग एवं आरटीए विभाग की संयुक्त टीम ने अतिरिक्त अनाज मंडी में दूसरे दिन भी निजी स्कूलों की बसों की फिटनेस जांची। कई बसों में नियमों को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई। सबसे बड़ी लापरवाही तो यह रही कि बसों में बच्चों को चढ़ाने व उतारने के लिए जो सहायक रखे गए थे, उनके पास संबंधित विभाग के लाइसेंस तक नहीं थे।
टीम में शामिल अधिकारियों ने बस व स्कूल संचालकों को जमकर लताड़ लगाई और निर्देश दिए कि जल्द से जल्दी खामियों को दूर करवाएं। साथ ही चेताया कि अगर दोबारा कमी मिली तो संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान टीम ने 106 बसों की फिटनेस जांच की। इनमें से 36 बसों में तो जरूरी व्यवस्थाएं लगभग ठीक पाई गईं, जबकि 70 बसों में भारी खामियां देखने को मिली। किसी में प्राथमिक उपचार बॉक्स नहीं मिला तो किसी में कैमरे खराब मिले।
कुछेक बसों में तो नियमों के आधार पर रंग भी सही नहीं मिला। सहायकों के पास लाइसेंस भी नहीं मिले। वहीं लाइटों, इंडिकेटर और सुरक्षा उपकरणों से संबंधित खामियां देखने को मिली।
आरटीए विभाग के मोटर वाहन निरीक्षक अनिल सैनी ने बताया कि दूसरे दिन भी बसों की जांच की गई। उन्होंने कहा कि संचालकों को जल्द खामियां दूर करवाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर जल्द सभी सुविधाएं पूरी कर विभाग को रिपोर्ट नहीं किया तो संचालकों को नोटिस देकर कड़ी से कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।
पूरे जिले में की जा रही है निजी स्कूलों की बसों की जांच ः महेंद्रगढ़ जिले में हुए स्कूल बस हादसे के बाद सुरक्षा के मद्देनजर शिक्षा और आरटीए विभाग की संयुक्त टीम की ओर से पूरे जिले में निजी स्कूलों की बसों की जांच की जा रही है। इसी जांच के तहत नौ दिसंबर से स्कूलों की बसों को जांचने का काम शुरू किया गया है। अभी तक संयुक्त टीम ने कलायत और कैथल में जांच पूरी कर ली है। जबकि सीवन, चीका और पूंडरी में स्कूल बसों की जांच किया जाना बाकी है।