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बूरा खाप की पंचायत में सामाजिक बदलाव को लेकर लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसले

Mon, 19 Sep 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो कैथल
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गांव बालू व सहारण में हुई बुरा खाप की पंचायत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 गांव बालू व सहारण में बूरा खाप की पंचायत में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। गोत्र के गांवों में किसी की मृत्यु पर शोक की अवधि को 13 दिनों से घटाकर सात दिन कर दिया गया। पंचायत की अध्यक्षता खाप अध्यक्ष रणधीर सिंह किरमच ने की।
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 पंचायत को संबोधित करते हुए रणधीर सिंह ने बताया कि हमारे समाज में फैल रही दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, नशा जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए हम सबको एक साथ मिलकर आगे आना होगा और इस मामले में कठोर कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक सर्व बूरा खाप भिवानी, झज्जर, रोहतक, सोनीपत, हिसार जिलों के विभिन्न गांवों में महापंचायतें कर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनमत तैयार कर चुके हैं। अब जिला कैथल के बालू गांव से बूरा खाप ने सबसे बड़े गांव बालू से इस अभियान की शुरूआत की है। उन्होंने बताया कि गांव बालू की महापंचायत में गांव की तीनों पट्टियों के अलावा तितरम, सेहरदा, सारण, कुराड, कैलरम आदी गांवों के सभी जातियों व धर्माें के लोग मौजूद रहे।

 पंचायत में जिन सात सामाजिक कुरीतियों पर बात हुई उनमें मृत्यु भोज के नाम पर हो रहे आडंबर पर रोक लगाना मुख्य रहा। प्रवक्ता ने कहा कि मृत्यु भोज अब शोक नही जश्न बन कर रह गया है। मृत्यु भोज आडंबर के चक्कर में गरीब आदमी बुरी तरह से पिस कर रह गया है। महापंचायत में मौजूद सभी लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया की आज के बाद वे मृत्यु भोज को शोक की तरह से ही पूरा करेंगे तथा उसपर टेंट, खाना, मिठाइयों आदि पर खर्च को नहीं करेंगे। महापंचायत में दूसरी बुराई डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया। प्रवक्ता का कहना था कि विवाह शादी में डीजे पर अनावश्यक रूप से खर्च होता है। बच्चे शराब पीना सीखते हैं तथा उससे होने वाले भारी ध्वनि प्रदूषण के कारण पशुओं के गर्भ धारण में 40 प्रतिशत तक की कमी आ रही है। महापंचायत में किसी मृत्यु पर 13 दिनों तक किए जाने वाले शोक के समय को घटा कर 7 दिन किया गया। मृतक की अर्थी पर केवल एक कफन व एक चादर चढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया। जो लोग चादर चढ़ाना चाहते हैं वे चादर की बजाए घी, नारियल व हवन सामग्री चिता में डाल सकते हैं।
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दाह संस्कार में रिश्तेदारों के बुलाने पर प्रतिबंध लगाया गया जिससे उनपर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ व समय का बचाव हो सकेगा। किसी भी रिश्तेदार से आटा, चावल, घी, सिद्धा स्वीकार न किया जाए। इसके अलावा विवाह व मांग रस्म में पांच सौ या हजार के नोटों की बजाए दस रुपये दिये जाने व लिये जाने का निर्णय लिया गया। पंचायत में मौजूद सभी जातियों व धर्मों के लोगों ने हाथ उठा कर बूरा खाप के निर्णयों का स्वागत किया व आज से लागू करने का निर्णय लिया।
गोत्र द्वारा यह अभियान गत पांच सितंबर से शुरू किया गया था। आगामी 26 सितंबर तक चलेगा। इसके बाद सभी गांवों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महापंचायत में प्रधान रणबीर बुरा, दयानंद बुरा, नसीब बुरा, अमीर सिंह, भल्ले राम बुरा, बलवंत, पिरथी राम, मास्टर जयपाल, प्रेम खानपुर, ग्राम सरपंच रमेश कुमार, गजे सिंह, गुरुदेव बालू, कर्मवीर, विरेंद्र सरपंच, भले राम, भूरा, नसीब भाणा, शेर सिंह, केर सिंह, बलवत, किरपाल एडवोकेट, अजमेर, पाला रामशीश राम, शमशेर, मंगत नंबरदार सहित भारी संख्या में लोग मौजूद थे। महापंचायत में मौजूद लोगों ने तत्काल प्रभाव से अपने अपने गांवों में सभी निर्णयों को लागू करने की बात कही।

ये फैसले लिए गए
1. मृत्यु भोज के नाम पर हो रहे आडंबर पर रोक लगाने का फैसला
2. डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया
3. किसी की मृत्यु पर 13 दिनों तक किए जाने वाले शोक के समय को घटा कर 7 दिन किया गया।
4. मृतक की अर्थी पर केवल एक कफन व एक चादर चढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया। जो लोग चादर चढ़ाना चाहते हैं वे चादर की बजाए घी, नारियल व हवन सामग्री चिता में डाल सकते हैं।
5. दाह संस्कार में रिश्तेदारों के बुलाने पर प्रतिबंध लगाया गया जिससे उनपर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ व समय का बचाव हो सकेगा।
6. मृत्यु पर किसी भी रिश्तेदार से आटा, चावल, घी, सिद्धा स्वीकार न किया जाए। इसके अलावा विवाह व मांग रस्म में 500 या हजार के नोटों की बजाए दस रुपये दिये जाने व लिये जाने का निर्णय लिया गया।
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