सीजन में आने वाली लाखों क्विंटल धान की ऑनलाइन खरीद को लेकर आढ़तियों को अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं किसान भी फिलहाल इस योजना के तहत खरीद शुरू न होने के कारण मंडी में सीधे ही धान बेच रहे हैं। लेकिन एक अक्टूबर को लेकर स्थिति असमंजस की बनी हुई है। 22 सितंबर को आढ़तियों द्वारा संयुक्त मीटिंग कर इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। जिसमें धान की खरीद के कार्य का बहिष्कार भी हो सकता है।
ये रहेगी प्रक्रिया
किसान अनाज मंडी में अपनी धान लेकर आएगा। तो गेट पर ही उसका गेट पास कटेगा। इसके बाद आढ़ती की दुकान से सैंपल लिया जाएगा। इसके बाद उसकी गुणवत्ता, नमी सहित अन्य जानकारी जुटाकर ऑनलाइन कर दिया जाएगा। जिसे बाहर बैठा व्यक्ति भी खरीद सकेगा। किसान को भुगतान उसके खाते में किया जाएगा। वहीं आढ़ती की आढ़त उसके खाते में जाएगी। यदि बाहर बैठा व्यक्ति धान खरीदता है तो पहले उसकी पेमेंट आएगी, फिर उसकी धान आढ़ती के माध्यम से वहां भेजी जाएगी।
ऑनलाइन खरीद में हैं अनेक झोल
ऑनलाइन खरीद को लेकर हालांकि मार्केटिंग बोर्ड द्वारा किसानों व आढ़तियों को कई तरह की जानकारी दी गई है। जिले में काफी संख्या में किसानों का रजिस्ट्रेशन भी किया गया है। लेकिन हजारों की संख्या में पहुंचने वाले अधिकतर किसान अभी रजिस्ट्रेशन से वंचित हैं। जबकि ऑनलाइन खरीद उन्हीं किसानों की हो सकेगी, जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
आढ़तियों को असमंजस
1. गेट पर ही वजन किया जाएगा तो इसमें करीब 15 से 20 मिनट का समय लेगा। जिससे सीजन में जाम की स्थिति बन जाएगी।
2. इंट्री होने के बाद आढ़ती कैसे इसकी जांच करेंगे, क्योंकि उनके पास प्रशिक्षित स्टाफ नहीं हैं।
3. धान बिक्री पर सवाल उठेंगे, क्योंकि मिलर्स को उच्च गुणवत्ता की जांच करनी होती है। जबकि मार्केट कमेटी कार्यालय में सामान्य लैब है। जिसमें सभी पहलुओं पर विचार नहीं हो पाएगा। इससे खरीददारों व किसानों के परेशानी होगी।
4. सरकार का कहना है कि जब आढ़तियों के खाते में पैसा आ जाएगा, तभी धान का उठान होगा। ऐसे में यह बात स्पष्ट नहीं है कि यह पैसा कौन देगा? सरकार, व्यापारी या दूसरा खरीददार।
5. सीजन में आने वाली लाखों क्विंटल धान का जब उठान नहीं होगा तो मंडियां जाम हो जाएंगी। जिससे किसान परेशान होगा।
6. बाहर से यदि किसी ने धान खरीद भी लिया तो उसका बारदाना कौन देगा? उसका भुगतान कैसे होगा?
अभी तक नहीं लगे आढ़तियों के यहां कंप्यूटर
ऑनलाइन खरीद के हिसाब-किताबे के लिए आढ़तियों के यहां कंप्यूटर लगाए जाने हैं। लेकिन अभी तक अनाज मंडी में कंप्यूटर नहीं लगे हैं। जबकि सीजन में सरकारी खरीद शुरू होने में चंद दिन बचे हैं। ऐसे में कैसे ऑनलाइन खरीद होगी, यह समझ से परे है।
पता चला है कि कंप्यूटर से खरीद होगी। अभी तक तो शुरू नहीं हुई। इसलिए मैंने अपनी धान 1800 रुपये में बेच दी है।
अनाज मंडी में धान लेकर पहुंचा किसान।
अभी तक आढ़तियों को तो दूर, अधिकारियों को ही स्पष्ट नहीं है कि धान की ऑनलाइन खरीद कैसे होगी? कई बार जानकारी देने का प्रयास किया गया है। लेकिन आढ़तियों को अभी तक यह समझ नहीं आ रहा। सीजन के समय इतनी ज्यादा मात्रा आने वाली धान की इस सिस्टम के तहत कैसे खरीद हो पाएगी?
सुरेश मित्तल, अध्यक्ष, आढ़ती एसोसिएशन, कैथल।
ना तो आढ़तियों व ना ही किसानों को इस योजना को लेकर जानकारी समझ में आ रही। आढ़ती खुद असमंजस में हैं। उन्हें अनेक बातों के जवाब नहीं मिल रहे। 22 सितंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली बैठक में राज्य स्तर पर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
अश्विनी शोरेवाला, पूर्व अध्यक्ष, आढ़ती एसोसिएशन कैथल।
किसानों व आढ़तियों को नहीं आने दी जाएगी परेशानी : सचिव
मंडी सचिव संजीव सचदेवा ने बताया कि कैथल में करीब 8 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। शेष का मंडी में पहुंचने पर साथ के साथ कर दिया जाएगा। मार्केट कमेटी कार्यालय में कंप्यूटर लगाए जा रहे हैं। सोमवार को डीएफएससी के साथ आढ़तियों की बैठक है। जिसमें इस योजना की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि आढ़ती व किसानों को कोई परेशानी ना हो।