संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। शहर में बेसहारा पशुओं और बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे लोग अपने घरों और गलियों से निकलने में डरने लगे हैं। नगर पालिका की ओर से इन पशुओं को पकड़ने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या खत्म होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है।
शहर की गलियों में आवारा कुत्तों का झुंड नजर आता है जो रात में राहगीरों और बाइक सवारों के पीछे दौड़ते हैं और हमला करते हैं। कई बार इनके कारण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं घरों की छतों पर हिंसक बंदर उछल-कूद करते हैं, कपड़े फाड़ देते हैं, पानी की टंकियों के ढक्कन खोल देते हैं और खाने-पीने की चीजें उठा ले जाते हैं।
कई बार ये बच्चों और बुजुर्गों पर भी हमला कर चुके हैं, जिससे लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
शहरवासी दीपक जिंदल, डिंपल कुमार, सुशील जिंदल, सुरेश कुमार और अन्य ने बताया कि नगर पालिका की ओर से बेसहारा पशुओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। शिकायतें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि केवल अभियान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और प्रभावी
समाधान की जरूरत है, वरना भविष्य में यह बड़े हादसे और संक्रमण का कारण बन सकता है।
नगर पालिका अध्यक्ष रेखा रानी ने बताया कि आवारा पशुओं और बंदरों को पकड़ने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पकड़े गए पशुओं को गोशाला या नंदीशाला में भेजा जाता है। इसके लिए नपा की बैठक में प्रस्ताव भी लिया जा चुका है और इसे शीघ्र अमलीजामा पहनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रयास है कि आमजन की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी तक कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा है। लोग डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो शहर में जनसुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन सकती है।