संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भाई साहब... जरा पर्ची देख लेना, ये डॉक्टर कहां बैठते हैं... सामने से जवाब मिलता है- इस पर्ची पर तो डॉक्टर का नाम ही नहीं लिखा...। बुधवार को नागरिक अस्पताल में कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले। यहां पिछले तीन दिनों से ऑनलाइन ओपीडी पर्ची की व्यवस्था बंद है और मरीजों को ऑफलाइन पर्ची दी जा रही है।
समस्या यह है कि ऑफलाइन पर्ची पर डॉक्टर का नाम अंकित नहीं होता, जिससे मरीजों को यह तक पता नहीं चल पा रहा कि उन्हें किस डॉक्टर के पास जाना है।
हालात यह हैं कि अनपढ़ मरीज पढ़े-लिखे लोगों से पर्ची दिखाकर जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टर का नाम न होने के कारण कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा। नतीजतन मरीज कभी एक कमरे तो कभी दूसरे कमरे के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जिससे उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन इस समस्या के पीछे कंप्यूटर सिस्टम में तकनीकी खामी बता रहा है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ऑफलाइन पर्ची तो काटी जा रही है, लेकिन मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पा रही है।
ऑनलाइन पंजीकरण बंद होने का असर मेडिकल कराने आने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। मरीजों को घंटों लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है। पंजीकरण प्रक्रिया धीमी होने के कारण अस्पताल परिसर में लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों का समय खराब हो रहा है। मरीजों का कहना है कि पहले ऑनलाइन पंजीकरण से काम जल्दी हो जाता था, लेकिन अब ऑफलाइन व्यवस्था के चलते समय ज्यादा लग रहा है। बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि व्यवस्था को चेक कराया जाएगा। जहां दिक्कत है, उसका समाधान कराएंगे।
परेशानी... लोगों की जुबानी
अंकिता ने बताया कि वह सोमवार को मेडिकल कराने के लिए अस्पताल आई थी, लेकिन पंजीकरण स्लिप न बनने के कारण बिना इलाज कराए लौटना पड़ा। बुधवार को दोबारा आने पर भी यही बताया गया कि अभी ऑनलाइन स्लिप नहीं कट रही, जिससे उसे काफी परेशानी हो रही है।
मुकेश ने बताया कि वह ऑपरेशन के लिए अस्पताल आया है। पर्ची पर केवल कमरा नंबर लिखा है, डॉक्टर का नाम नहीं। ऑनलाइन पंजीकरण न होने के कारण उसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही, जिससे ऑपरेशन से जुड़ी औपचारिकताओं में देरी हो रही है।
संदीप ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ मेडिकल जांच के लिए आया है। घंटों इंतजार के बाद नंबर आया, तब पता चला कि कंप्यूटर में तकनीकी समस्या के कारण अस्पताल में ऑफलाइन पंजीकरण किया जा रहा है।