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Kaithal News: एसआईआर शुरू पर पहले दिन बैठकों में ही उलझे रहे बीएलओ

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प्र​शिक्षण के दौरान राजनीतिक दलों के बीएलए। आर्काइव - फोटो : Archive
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कैथल। जिले में प्रशासनिक दावों और तैयारियों के बीच एसआईआर अभियान की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सकी। 15 जून से इस अभियान को धरातल पर शुरू होना था लेकिन पहले दिन का पूरा समय केवल बैठकों और दिशा-निर्देशों के दौर में ही बीत गया। पहले दिन बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) फील्ड में जाने के बजाय प्रशासनिक बैठकों में ही व्यस्त रहे।
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विभिन्न खंडों और तहसील मुख्यालयों पर अधिकारियों ने बीएलओ और सुपरवाइजरों की बैठकें लीं। इन बैठकों में प्रपत्रों को भरने, एप के संचालन और डाटा कलेक्शन की बारीकियों के बारे में निर्देश दिए गए। वहीं कुछ बीएलओ को संबंधित विभाग ने रिलीव नहीं किया।
सीवन और कैथल ब्लाॅक के बीएलओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले दिन वे बैठकों में व्यस्त रहे। इसलिए फील्ड में शुरुआत नहीं कर सके। उन्हाेंने आरोप लगाया कि पहले उनकी ड्यूटी जनगणना में लगा दी और अब एसआईआर में जबकि कई शिक्षकों की अब तक ड्यूटी नहीं लगाई गई है। हालांकि कलायत खंड में कुछ बीएलओ ने फील्ड में उतरकर काम किया।
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जिले के करीब 1 लाख 75 हजार लोगों की वोट नए डिजिटल सिस्टम से मैप नहीं हो पाई है। इनका 2002 के पुराने डाटा से मिलान नहीं हो पाया है। इससे इनकी वोट कटने की आशंका है। प्रशासन और चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन लोगों के नाम अभी मिशन या आधार से मैप नहीं हैं, वे आगामी प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करा सकते हैं।
लेक्चरर की डाटा एंट्री में ड्यूटी पर रोष : प्रशासन ने एसआईआर के तहत होने वाली डाटा एंट्री के काम में कंप्यूटर साइंस के सीनियर लेक्चरर्स (प्राध्यापकों) की ड्यूटी लगा दी है। इस फैसले के बाद हसला के पदाधिकारी राजीव मलिक का कहना है कि 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले गजटेड क्लास-टू लेक्चरर्स से क्लर्क या ऑपरेटर स्तर का डाटा एंट्री का काम करवाना पूरी तरह अतार्किक है। यह उनके पद की गरिमा के खिलाफ है।

प्रशिक्षण के दौरान राजनीतिक दलों के बीएलए। आर्काइव- फोटो : Archive

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