चुनावी घोषणा पत्र के बाद भारतीय जनता पार्टी को ठंडे बस्ते में जा चुके एसवाईएल के मुद्दे की याद आई। भाजपा नेताआें और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को भाई उदय सिंह किले के बाहर सुबह 10 बजे से सांय 5 बजे तक एक दिन का सांकेतिक धरना देकर उपवास रखा और गांधीवादी तरीके से पंजाब सरकार से हरियाणा के हक का पानी मांगा। कार्यक्रम का आयोजन विधायक लीला राम की अध्यक्षता में हुआ। जिसमें सांसद नायब सैनी, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के पुत्र तुषार ढांडा, रविभूषण गर्ग, अरुण सर्राफ सहित अनेक नेताओं ने भाग लिया।
दोपहर बाद सांसद नायब सिंह सैनी भी धरनास्थल पर पहुंचे और कहा कि तीनों कृषि कानून किसान की मजबूती और आय बढ़ाने के लिए क्रांतिकारी कदम है। पीएम और सीएम ने किसान हितों के लिए देश-प्रदेश में अनेकों योजनाएं लागू की हैं। पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार किसान की हर शंका और भ्रम को दूर करेेगी और किसी को भी दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। पंजाब को चाहिए कि वह हरियाणा के हक का पानी हरियाणा के किसानों को दें। कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक लीला राम ने कहा कि हरियाणा के किसानों के लिए भाजपा ने एक दिन का उपवास इसलिए रखा है, ताकि गांधीवादी तरीके से पंजाब के हुक्मरानों तक यह संदेश जाए कि हरियाणा को छोटा भाई मानते हैं तो उनके हकों का पानी भी दिया जाए। पंजाब से खैरात नहीं, अपने हिस्से की मांग कर रहे हैं। इसलिए एक दिन का उपवास रखकर गांधीवादी तरीके से अपना हक मांग रहे हैं। कृषि कानूनों पर किसानों की मांग पर सरकार से उम्मीद है कि जल्द मसले का हल निकलेगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक गुर्जर ने कहा कि एमएसपी और मंडियां खत्म नहीं होगी और न ही कोई पूंजीपति किसान की जमीन पर कब्जा कर पाएगा। एमएसपी पहले की तरह लागू रहेगा और निरंतर बढ़ता रहेगा। इस कानून में कही भी इस बात का जिक्र नहीं है कि कांट्रैक्ट फार्मिंग में जमीन के साथ अनुबंध होगा अपिुत यह स्पष्ट किया गया है कि फसल के लिए ही अनुबंध होगा। इस बिल में किसान अपनी फसल को खेतों से, मंडियों में और किसी भी बाजार में अच्छे दामों पर बेच सकेगा। सरकार ने धरने पर बैठे लोगों की बात को सुना और उनके सुझावों पर अमल करने के लिए 3 मंत्रियों की कमेटी भी गठित की है। इस अवसर पर विधायक पूर्व विधायक तेजवीर सिंह, महामंत्री रामपाल राणा, सुरेश संधु, संजीव राणा, भीम सैन अग्रवाल, जिला मीडिया प्रभारी राज रमन दीक्षित, रामकुमार नैन, कृष्ण शर्मा पिलनी, अशोक सैनी, अशोक भारती, संदीप कैलरम, नरेश मित्तल, मुकेश जैन, धीरेंद्र रामफल कृष्ण केवल, हरि चंद जांगड़ा सहित अनेकों कार्यकर्ता मौजूद रहे।