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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने तीन कृषि कानूनों पर रखा पार्टी का पक्ष

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भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने सोमवार को कैथल के लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में पार्टी की ओर से तीन कृषि कानूनों पर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया और कहा कि कृषि उपज बेचने के मामले में बदलाव समय की मांग है। इसमें जो भी परेशानियां सामने आएंगी, समय-समय पर उनकी जानकारी जुटाकर उनका समाधान करवा दिया जाएगा। बराला ने इस दौरान अमर उजाला के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आढ़तियों को भी कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। यदि कोई दिक्कत भी आएगी तो उसका समाधान करवाया जाएगा।
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बराला ने कहा कि पीएम मोदी ने किसान की आय को दोगुना करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। कृषक उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 को पारित होने से देश के करोड़ों किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। अब किसान अपनी फसलों को मंडी, खेत और देश के किसी भी कोने में लाभकारी मूल्य पर बेच सकेंगे। भाजपा ने चाहे अटल बिहारी वाजपेयी का समय हो या फिर अब नरेंद्र मोदी का, किसानों के हित में केसीसी, 6000 रुपये सालाना, फसल बीमा योजना जैसी योजनाएं चलाई हैं। नए विधेयक के पारित होने से न तो मंडिया खत्म होंगी और ना ही एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य। कुछ लोग प्रतिशत में एमएसपी बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन वे भूल गए कि वाजपेयी जी के समय में 19 प्रतिशत एमएसपी बढ़ाया गया था।
किसान के नाम पर राजनीति का इलाज नहीं: सुभाष बराला ने कहा कि कानूनों के बदलाव के बाद जो भी दिक्कत आएगी, उसका समाधान है। लेकिन किसानों के नाम पर राजनीति का कोई इलाज नहीं है। सेना तक की गाड़ी आंदोलन में रोकी जा रही है। जो गलत है। विधायक लीला राम, पूर्व प्रत्याशी राव सुरेंद्र सिंह, पूर्व चेयरमैन अरुण सर्राफ, राजपाल तंवर, जिला परिषद उपाध्यक्ष मनीष कठवाड़, पूर्व जिला अध्यक्ष सुभाष हजवाना, मंडल अध्यक्ष भारती, रामकुमार नैन, हरपाल क्योड़क भी मौजूद थे।
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