शहर की जानी-मानी सोनोलॉजिस्ट डा. चेतना शर्मा का यह पक्षियों के प्रति अनुपम प्रेम ही है कि वे देश के लगभग हर कोने में घूम चुकी हैं और 990 से ज्यादा पक्षी देख कर उनकी लिस्ट बना चुकी हैं। उनके प्रयासों के कारण वन्य प्राणी विभाग को कुरुक्षेत्र के गांव थाना में प्रवासी पक्षियों का अनोखा संसार मिलने पर उसे कम्यूनिटी बर्ड सेंचूरी बनाने का फैसला लेना पड़ा। वहीं विश्व स्तर पर विलुप्त हो रहे एक पक्षी की गांव सांपन खेड़ी के तालाब में पूरी कालोनी ढूंढने का भी श्रेय उन्हें जाता है। पिछले 15 सालों से बर्ड वॉचिंग कर रही डा. चेतना शर्मा से अमर उजाला द्वारा जब पक्षियों पर उनसे चर्चा शुरू की गई तो चर्चा थमी ही नहीं। वे काफी देर तक पक्षियों पर अपने अनुभव, उनकी प्रजातियों, आज के समय में पक्षियों के लिए खतरनाक होते जा रहे माहौल व चुनौतियों के बारे में जानकारी देतीं रहीं।
पिता की प्रेरणा और एक सुंदर चिड़िया देखकर हुआ बर्ड वॉचिंग का शौक
डा. चेतना शर्मा ने बताया कि वे दिल्ली से हैं। उनके पिता उन्हें जू में ले जाते थे। जहां पक्षी व पशु देखकर अच्छा लगता है। पहली बार जब कारबेट नेशनल पार्क नैनीताल में एशियन पेराडाइस फ्लाई कैचर नामक चिड़िया देखी तो इतनी खुशी हुई कि उसे बयां नहीं किया जा सकता। यह एक बड़ी सुंदर लंबी सफेद पूंछ वाली चिड़िया है। वहां गई तो टाइगर देखने थीं, लेकिन वहीं से पक्षियों के प्रति शौक जागृत हो गया। इसके बाद वे कैथल आईं। यहां आकर वृद्धकेदार सरोवर के सामने ही ऐतिहासिक झील में पक्षी देखे। फिर अपने आस-पास पक्षियों को ढूंढना शुरू किया तो आज तक यह सफर जारी है।
कबूतर, कौवों के अलावा भी अनोखे पक्षी हैं हमारे यहां
डा. शर्मा बताती हैं कि अमूमन हम अपने घरों में कौवा, कबूतर जैसे पक्षी ही देखते हैं। यदि हम ध्यान दें तो इनके अलावा और भी अनेकों अनोखे पक्षी हैं हमारे यहां। उन्होंने कॉलन की हैंड बुक ऑफ बर्ड सहित इंटरनेट से मदद ली। बाद में पक्षियों के नाम जानना शुरू किया। दिल्ली सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बर्ड वॉचिंग ग्रुप से जुड़ीं। उनसे जानकारी मिलीं। खेतों में जाना शुरू किया। पक्षी देखे। इसके लिए उन्होंने बानोक्लॉस जैसे विशेष उपकरण खरीदे। फिर अपने दोस्तों के साथ ग्रुप में जाना शुरू कर दिया।
देश के हर कोने में जाकर पक्षी देख चुकी हैं
पक्षियों के लिए उन्होंने चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड में अमूरफाल्कन, केरला, गुजरात के जामनगर, आंध्रा, कश्मीर के लद्दाख, तमिलनाडु सहित देश के लगभग हर कोने में जाकर पक्षी देखे हैं। भारत में इस समय लगभग 1400 पक्षियों की प्रजातियां हैं। जिसमें से अकेले हरियाणा में करीब 700 प्रजातियां मिल जाती हैं।
थाना में पक्षियों का ठिकाना देखा तो हैरान रह गई
पक्षियों के लिए वे कुरुक्षेत्र के गांव थाना में गईं। जहां किवंदती के अनुसार 100 एकड़ से ज्यादा में प्राचीन एवं असली ब्रह्मसरोवर है। यहां प्रवासी पक्षी आते हैं। जिसमें कई दुर्लभ प्रजाति के हैं। इसकी रिपोर्टिंग शुरू की। वन्य प्राणी विभाग भी इससे प्रभावित हुआ और अब वहां शीघ्र ही कम्यूनिटी बर्ड सेंचूरी बनने जा रही है। केवल पक्षी प्रेम नहीं है। इसके साथ-साथ पूरी प्रकृति से प्रेम हो जाता है। इसमें पशु, पर्यावरण सब कुछ शामिल है।
अकेले कैथल में कई बर्ड प्लेस विलुप्त हो गए
डा. शर्मा बताती हैं कि पिछले पंद्रह सालों में कई प्रजातियां यहां तक कि गोरैया जैसी चिड़िया भी काफी कम हो गई हैं। गांव बात्ता में पहले प्रवासी पक्षी आते थे। अब वहां तालाब ही सूख गया है। वहीं अब वृद्धकेदार सरोवर पर भी मछली पालन के कारण धागे लगा दिए गए हैं। कई गांवों में भी यही स्थिति है।
पक्षियों को संरक्षण व जनता द्वारा ध्यान दिए जाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि पक्षी जैव विविधता की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये कम हो गए तो धीरे-धीरे इंसानों पर इसका असर पड़ना शुरू हो जाएगा। खेतों में डाली जाने वाली खरपतवार व कीटनाशक दवाओं, मछली पालन के लिए तालाब को ठेके पर दिए जाने, शहरीकरण, पक्के मकानों के कारण पक्षियों के रहने की जगह खत्म हो गई हैं। हमें इनके संरक्षण के लिए आगे आना होगा।
सांपन खेड़ी में मिली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विलुप्त होती प्रजाति की पूरी कालोनी
गांव सांपन खेड़ी के छोटे से तालाब में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही विलुप्त होने वाली पक्षियों की श्रेणी में शामिल ब्लैक हेडेड आईबिस का पूरा परिवार मिला। करीब एक हजार से ज्यादा की संख्या में ये पक्षी यहां हैं। जिन्होंने यहां बच्चे पैदा किए हैं। जब इसकी रिपोर्टिंग राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी प्रेमियों तक हुई तो वे भी हैरान रह गए। यह अपने आप में बड़ा मामला है कि हमारे यहां विलुप्त होती प्रजाति के पक्षी इतनी बड़ी संख्या में हैं।
व्हॉट्सएप, फेसबुक से कर रही हैं जागरूक
डा. चेतना शर्मा ने बताया कि उन्होंने व्हॉट्सएप का एक ग्रुप बनाया है। साथ ही फेसबुक पर अपना पेज बनाया हुआ है। जिससे आरकेएसडी कॉलेज सहित देश भर से काफी संख्या में विद्यार्थी व पक्षी प्रेमी जुड़े हैं। पक्षियों की फोटो के लिए उन्होंने दो बड़े डीएसएलआर कैमरे, टेलीफोटो लैंस लिया हुआ है। ताकि अच्छी फोटोग्राफ्स हो सकें। वे कई बर्ड काउंटिंग प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर चुकी हैं। अब उनकी बहन गीता गोस्वामी, भतीजी दिव्या भी बर्ड वॉचिंग करती हैं। उनके पति अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक डा. नलिन शर्मा भी उनके इस शौक में पूरा सहयोग करते हैं। अब वे भी पक्षियों के संरक्षण में आगे आए हैं और काफी कुछ करना चाहते हैं।