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छापे पर गैर हाजिर प्राध्यापक बिफरे बोले, बायोमीट्रिक का नहीं औचित्य

Tue, 23 Aug 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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डा. राजबीर पाराशर - फोटो : ब्यूरो
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कैथल। आरकेएसडी कालेज की प्रशासक एवं एसडीएम मनदीप कौर ने मंगलवार सुबह 9 बजे कालेज, बीएड, फार्मेसी तथा संबंद्ध शिक्षण संस्थानों में औचक निरीक्षण कर स्टॉफ की हाजिरी चैक की। जिसमें कालेज में 55 में से 25 प्राध्यापक गैर हाजिर मिले। वहीं बीएड में 13 में से 8 प्राध्यापक गैर हाजिर थे।
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प्रशासक ने प्रिंसिपल को निर्देश दिए कि सभी गैर हाजिर प्राध्यापकों से इस संबंध में स्पष्टीकरण लिया जाए। इसके बाद विभागीय कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने कहा कि 1 सितंबर से पहले बॉयोमीट्रिक मशीन स्थापित की जाए। ताकि सभी की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

एसडीएम मनदीप कौर ने बताया कि इस प्रकार की छापेमारी आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अध्ययन एवं अध्यापन कार्य सही ढंग से चल रहा है।
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उधर, कॉलेज के कुछ सीनियर प्रोफेसरों का कहना है कि उच्चतर शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार प्राध्यापक को कॉलेज में साढ़े पांच घंटे बिताना अनिवार्य है।

जिस प्राध्यापक का पहला पीरियड सुबह दस बजे का है, वह नौ बजे कैसे पहुंच पाएगा। वह दस बजे के बाद ही साढ़े पांच घंटे तक कॉलेज में पढ़ाएगा।

व्यक्तिगत टाइमटेबल अनुसार ही पहुंचेगे प्राध्यापकः एचसीटीएम
कैथल(ब्यूरो)। हरियाणा कालेज टीचर्ज एसोसिएशन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष तथा एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव कांउसिल के सदस्य डा. राजबीर पाराशर ने कालेज प्रशासक व एसडीएम मनदीप कौर की छापेमारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कैलेंडर के अनुसार कालेजों में टाईम टेबल व्यक्तिगत तौर पर हर प्राध्यापक का उसके द्वारा ली जाने वाली कक्षाओं के अनुरूप ही निर्धारित है। हर प्राध्यापक प्रात: 9 बजे कालेज में पहुंचने के लिए बाध्य नहीं है।

डा. पाराशर ने कहा कि राज्य सरकार ने साढ़े 5 घंटे की कॉलेज व विश्वविद्यालयों में उपस्थिति अनिवार्य है। जिसके अनुसार सभी प्राध्यापक पहुंचते हैं और अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की छापेमारी स्कूली स्तर तक  उचित है।

जहां सभी के लिए एक टाइमटेबल समान है। डा. पाराशर ने कहा कि कालेजों व विश्वविद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन का कोई उपरोक्त कारणों से कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि एसडीएम पहले पूरे मामले की जानकारी हासिल करतीं। आरकेएसडी कॉलेज का वर्क कल्चर के मामले में शुरू से ही रिकॉर्ड रहा है।
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