संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विश्व पर्यटन दिवस बुधवार को है। कैथल जिले में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं जिन्हें पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसमें प्राचीन बावड़ी और भाई उदय सिंह किला शामिल है।
प्राचीन बावड़ी मुगलकालीन है तो भाई उदय सिंह किला अंतिम हिंदू प्रशासक का किला है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दोनों ही ऐतिहासिक स्थल कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड यानी केडीबी के माध्यम से पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं। क्योंकि इन दोनों की केंद्रों का इतिहास काफी पुराना है और इन स्थानों का काफी महत्व भी है। यदि ये स्थल पर्यटन केंद्र के विकसित हुए तो इससे सरकार को काफी लाभ मिलेगा।
इतिहास के तथ्यों के तहत भाई उदय सिंह के किले से कैथल की महारानी महताब कौर इस बावड़ी में स्नान करने के लिए आती थी, जबकि इतिहासकारों का कहना है कि यह बावड़ी दिल्ली सल्तनत के समय बनाई गई थी। उस समय यह जल संग्रहण करने का प्रमुख स्रोत थी। बावड़ी में सैनिकों के लिए जल का संग्रहण किया जाता था, ताकि युद्ध व अन्य परिस्थितियों में राज्य में पानी की कमी न रहे। इसका निर्माण कैथल राज्य के भाई शासकों द्वारा सन 1767 से 1843 के मध्य करवाया गया था। निर्माण के समय यह पानी का एक बहुत बड़ा टैंक था। तीन मंजिल में गहराई तक इसे चूना, सुरखी और लाखौरी ईंटों से बनाया गया है। इस आकार स्टेपवेल में हैं, जिसमें अंदर जाने के लिए सीढ़ियां दी गई हैं। इस गुंबद के आकार में बनी छत से ढका गया है और अंदर जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के दोनों तरफ मोटी-मोटी पुरानी ईंटों की दीवारें बनाई गई हैं। अंदर जाने के लिए अस्पताल के मुख्य गेट के साथ ही इसका गेट बनाया गया है। इसके अलावा दीवारों पर भी ईंटों को काटकर कलाकारी की गई है।
भाई उदय सिंह किला का यह है इतिहास
जिले के इतिहास में भाई उदय सिंह किले का अपना एक अलग महत्व है। इस पर केवल बाहरी सुंदरीकरण करने के अलावा अन्य प्रकार से इसे विकसित नहीं किया गया है। हालांकि वर्ष 2013 में इस किले का जीर्णोद्धार तो हुआ, लेकिन यह जीर्णोद्धार केवल बाहर से दिखने तक ही सिमट कर रह गया। किले के अंदर कोई कार्य नहीं करवाया गया, जिससे इस स्थान को पर्यटन के रूप में विकसित करवाया जा सके। शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। इतिहासकारों के अनुसार भाई उदय सिंह का किला 1570 ई में अकबर के काल में बना था। इसे अकबर ने सेना के लिए बनवाया था। इसके बाद सन् 1747 में सिखों का राज स्थापित हुआ था। जिसमें सिख शासक देसू सिंह ने इस क्षेत्र पर जीत हासिल करके कैथल को अपनी राजधानी बनाया था।
इन केंद्रों का पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित न होना जागरूकता का अभाव है। भाई उदय सिंह किला को अच्छे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए जिले के लोगों को स्वयं आगे आना होगा। यदि लोग इस पर आवाज उठाएंगे तो जिला प्रशासन और सरकार जरूर जागेगी। - अध्यक्ष डॉ. अनिल ललित, पर्यटन विभाग अध्यक्ष, राजकीय कॉलेज
भाई उदय सिंह किले के साथ ही बावड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित जा सकता है। क्योंकि यह दोनों ही ऐतिहासिक स्थल पास-पास स्थित हैं। कम से कम से जिले के स्कूलों के लिए टूर के प्रति जागरूक किया जाए। किले का जो इतिहास है उसके संबंध में कुरुक्षेत्र में स्थित पर्यटन सहायता केंद्र में जागरूकता के पोस्टर लगाने चाहिए। जागरूकता से इन्हें एक पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है। लोग जागरूक होंगे तो इसमें सुधार भी होगा। - प्रो. डॉ. विकास यादव, पर्यटन विभाग