संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर की ऐतिहासिक धरोहर भाई छज्जूमल की बावड़ी आज भी अपनी भव्यता और प्राचीन वास्तुकला के कारण लोगों को आकर्षित करती है। यह बावड़ी न केवल कैथल की पहचान है, बल्कि जल संरक्षण की पुरानी परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। पुराने नागरिक अस्पताल के पास स्थित इस बावड़ी को देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। वर्तमान में इसका जीर्णोद्धार कार्य तेजी से चल रहा है।
ऐतिहासिक विरासत की झलक : इस बावड़ी का निर्माण वर्ष 1767 से 1843 के बीच भाई शासकों ने कराया था। उस समय यह क्षेत्र का प्रमुख जल स्रोत थी और आसपास के लोग पीने के पानी सहित अन्य जरूरतों के लिए इसी पर निर्भर रहते थे। खास बात यह रही कि गर्मियों में भी यहां पानी उपलब्ध रहता था, जो उस समय की उत्कृष्ट जल प्रबंधन प्रणाली को दर्शाता है।
वास्तुकला का अनूठा उदाहरण : यह बावड़ी तीन मंजिला संरचना में बनी है, जिसकी दीवारों और स्तंभों पर बारीक नक्काशी इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। सीढ़ीनुमा बनावट के कारण लोग आसानी से नीचे जल स्रोत तक पहुंच सकते थे। इसकी संरचना उस दौर की उन्नत इंजीनियरिंग और कलात्मक कौशल का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती है।
संरक्षण से मिलेगा नया आयाम : यह बावड़ी हमें जल संरक्षण के महत्व की याद दिलाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस धरोहर का प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह पर्यटन में पहचान दिला सकती है।
सामाजिक जीवन का केंद्र रही बावड़ी
समाजसेवी रामेश्वर फौजी के अनुसार, ऐसी बावड़ियां केवल जल संग्रहण का माध्यम नहीं थीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भी होती थीं। यहां लोग एकत्र होकर संवाद करते और आपसी संबंधों को मजबूत बनाते थे।