कैथल। डिजिटल मनोरंजन के दौर में ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी साइट्स तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। आसान पैसे कमाने के लालच में लोग इन साइट्स पर रजिस्ट्रेशन कर अपनी निजी जानकारी और बैंक डिटेल साझा कर देते हैं। इस पर चिंता जताते हुए पुलिस अधीक्षक उपासना ने कहा कि ऐसी अधिकांश साइट्स के पीछे साइबर ठग सक्रिय हैं, जो लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया, यूट्यूब विज्ञापनों, व्हाट्सएप ग्रुप या फर्जी वेबसाइटों के जरिये आकर्षक ऑफर देकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। शुरुआत में वे छोटे-छोटे रिटर्न देकर भरोसा जीत लेते हैं और फिर निवेश की रकम बढ़वाकर अचानक वेबसाइट या ऐप बंद कर देते हैं। कई मामलों में ठग कस्टमर केयर बनकर कॉल करते हैं और ओटीपी, यूपीआई पिन या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर खाते से पैसे उड़ा लेते हैं।
एसपी उपासना ने कहा कि भारतीय कानून के अनुसार ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म अवैध हैं। ये न तो किसी सरकारी एजेंसी से मान्यता प्राप्त हैं और न ही इन पर जमा पैसों की कोई सुरक्षा होती है। संवाद
ठग प्रायः इन साइट्स को विदेशी डोमेन पर बनाते हैं, जिससे शिकायत के बाद भी आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि ऑनलाइन बेटिंग, कैसीनो या किसी भी निवेश ऐप के झांसे में न आएं। आसान पैसे और ज्यादा रिटर्न का लालच साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें, अंजान नंबर पर पैसे ट्रांसफर न करें, और किसी से भी बैंक डिटेल, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें।
एसपी उपासना ने कहा कि यदि किसी के साथ ऐसी ठगी हो जाए तो घबराने की बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। समय पर दी गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।