संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पुलिस अधीक्षक उपासना ने कहा कि सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग जहां लोगों को जोड़ने में मदद कर रहा है, वहीं साइबर अपराधी भी इसे ठगी का आसान माध्यम बना चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी आईडी बनाकर ठग लोग परिचितों के नाम से मैसेज भेजते हैं और लोगों को धोखे में लेकर पैसे या निजी जानकारी हड़प लेते हैं।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर किसी मित्र, रिश्तेदार, अधिकारी या संस्था की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर फर्जी अकाउंट बनाते हैं। इसके बाद वे भरोसा जीतने के लिए मैसेज भेजते हैं और बहाने बनाकर आर्थिक मदद मांगते हैं। कई बार वे कहते हैं कि अस्पताल में आपातकालीन स्थिति है, इंटरनेट काम नहीं कर रहा, ट्रांजेक्शन लिमिट खत्म हो गई है या तुरंत पैसे की जरूरत है।
कुछ मामलों में ठग सरकारी योजना या इनाम की सूचना देने का झांसा देकर ओटीपी, बैंक विवरण या किसी लिंक पर क्लिक करवाने की कोशिश करते हैं। लोग अक्सर प्रोफाइल फोटो देखकर ही भरोसा कर लेते हैं और बिना पुष्टि किए पैसे भेज देते हैं, जिससे वे ठगी का शिकार हो जाते हैं। एसपी उपासना ने कहा कि किसी भी संदिग्ध मैसेज या कॉल पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। उन्होंने बताया कि यदि कोई परिचित बनकर पैसे मांगता है, तो पहले सीधे फोन करके पुष्टि करें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ
साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और स्क्रीन शेयरिंग अनुमति बिल्कुल न दें।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अवश्य लगाएं और संदिग्ध अकाउंट को तुरंत रिपोर्ट व ब्लॉक करें। साइबर अपराधी बेहद चालाक होते हैं और भावनात्मक दबाव बनाकर ठगी करते हैं, इसलिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है।
एसपी उपासना ने नागरिकों से अपील की कि अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए, तो घबराने की बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाएं। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, उतनी ही धन वापसी की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। सोशल मीडिया पर मिले हर मैसेज को सच न मानें, सत्यापन करें और ठगों को सफल न होने दें।