पुराने जमाने की तर्ज पर कैथल के प्राचीन आठ गेट फिर से शहर की सुंदरता को चार चांद लगाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार 2 करोड़ रुपये से प्राचीन आठ गेट बनाए जाएंगे। जहां पर ये पहले मौजूद थे।
आठ गेटों में बसता था शहर- कैथल प्राचीन शहर 8 गेटों के अंदर बसता था। जो सांय के समय बंद हो जाते थे। जो व्यक्ति बाहर रह जाते थे, उन्हें रात को बाहर ही रहना पड़ता था। ये आठ गेट चंदाना गेट, प्रताप गेट, डोगरा गेट, सीवन गेट, माता गेट, क्योड़क गेट, कोठी गेट, रेलवे गेट थे। जहां से शहर से बाहर निकलने के मार्ग होते थे।
केवल रेलवे गेट पर नजर आती हैं प्राचीन लाखौरी ईंट -
समय के साथ ये सभी गेट अपना अस्तित्व खो गए। लेकिन प्राचीन शहर की निकासी व प्रवेश के आज भी यही मुख्य मार्ग हैं। केवल रेलवे गेट पर कुछ प्राचीन लाखौरी ईंट दिखाई देती हैं।
कई बार उठ चुकी है मांग- इतिहासकार कमलेश शर्मा बताते हैं कि कैथल शहर प्राचीन आठ गेटों के भीतर बसता था। इन गेटों का पुनर्निर्माण करके इतिहास को संजोया जा सकता है। यह सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही मजबूत व्यवस्था थी। प्राचीन समय में बाहरी लोगों के हमलों की आशंका रहती थी। जिस कारण पूरा शहर गेटों के भीतर बसता था और सांय के समय ये गेट बंद हो जाते थे।
नगर परिषद ने तैयार किया एस्टीमेट- नगर परिषद की इंजीनियरिंग विंग ने इस संबंध में एक एस्टीमेट तैयार किया है। जिसके तहत सभी आठ गेटों के निर्माण के लिए सर्वे किया और एक एस्टीमेट तैयार करके विभाग को भेजा है।
एक्सईएन नगर परिषद हिमांशू लाटका ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं में शामिल आठ गेटों के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जैसे ही फंड की स्वीकृति होती है, यह काम करवा दिया जाएगा।