संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में पराली प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक सुरेंद्र सिंह ने किसानों से पराली प्रबंधन के लिए जागरूक होने का आह्वान करते हुए पराली जलाने से बचने की सलाह दी है।
उन्होंने दावा कर कहा कि विभाग के दृढ़ संकल्प और किसानों की बढ़ती जागरूकता के चलते अब तक जिले में पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि जिले में 4 लाख 47 हजार एकड़ में धान की फसल बोई गई है। विभाग की टीमें पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसान अब पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक हो रहे हैं, इसलिए पराली जलाने की घटनाएं तेजी से कम हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में किसानों के लिए करीब 260 बेलर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिनकी मदद से किसान फसल अवशेषों के गट्ठर (बेल) तैयार कर रहे हैं। ऐसा करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। किसान अब पराली प्रबंधन को लेकर आगे आ रहे हैं और इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
गांव जसवंती के किसान राजेश ने बताया कि पराली प्रबंधन को लेकर सरकार अच्छा कार्य कर रही है। जो किसान पराली का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करता है, उसे प्रति एकड़ 1200 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। गांव में बेलर मशीनें आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से किसान अपने खेतों में ही फसल अवशेष का प्रबंधन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब पराली जलाने की घटनाएं लगभग समाप्ति की ओर हैं।
उपनिदेशक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि तकनीक के इस युग में फसल अवशेष अब परेशानी नहीं, बल्कि कमाई का साधन बन रहे हैं।
पराली प्रबंधन पर प्रशासन का फोकस
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हर ब्लॉक में एक एचसीएस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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ग्राम स्तर पर इंफोर्समेंट टीमें गठित की गई हैं। हर 50 से 100 किसानों पर एक कर्मचारी निगरानी रख रहा है।
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पराली जलाने के बजाय मिट्टी पलटने वाले हल से दबाने या गोशालाओं को दान करने जैसे विकल्पों के लिए कर रहा प्रेरित। सब्सिडी वाले कृषि यंत्रों के उपयोग पर भी दिया जा रहा जोर।