संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बात्ता गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पिछले चार दशकों से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है, लेकिन अब इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है। विभाग की अनदेखी और रखरखाव की कमी से बिल्डिंग खस्ताहाल हो गई है। दीवारों में दरारें हैं, लेंटर उखड़ चुका है। मरीजों, तीमारदारों को डर के साए में इलाज करवाना पड़ रहा है।
डिलीवरी कक्ष भी असुरक्षित ः स्थिति इतनी खराब है कि यहां डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं तक को डर बना रहता है। डिलीवरी कक्ष की हालत भी दयनीय है। इस पीएचसी में स्वास्थ्यकर्मी और मरीज—दोनों असुरक्षित माहौल में कार्य और इलाज करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी ः ग्रामीण राकेश ने कहा कि प्रशासन को तुरंत इस पीएचसी की मरम्मत या नई बिल्डिंग निर्माण की दिशा में कदम उठाना चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का जवाब ः सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. किरण संधू ने बताया कि बिल्डिंग की हालत को लेकर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी पहले भी निरीक्षण कर चुके हैं। दोबारा निरीक्षण के लिए पत्र भेजा गया है और मामले की जानकारी सीएमओ मैडम को भी दे दी गई है।
30 हजार की आबादी को मिल रही असुविधा
करीब 32 साल पुरानी इस बिल्डिंग के अंतर्गत 6 गांवों की लगभग 30 हजार आबादी आती है। बरसात के दिनों में छत टपकने और अस्पताल परिसर में जलभराव के कारण स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कई बार मरीजों और स्टाफ को फर्श पर जमा पानी में से होकर गुजरना पड़ता है।
अस्पताल की खस्ता हालत।
अस्पताल की खस्ता हालत।