संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। रवि, इंद्र और ब्रह्मा योग के बीच श्री गणेश चतुर्थी महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार को कलायत के विभिन्न स्थानों और घरों में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना की। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर पहुंचे और पूजा-अर्चना के साथ बप्पा का स्वागत किया।
दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा। हालांकि श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन बाद भी बप्पा को विदा कर सकते हैं। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया की उदया तिथि के अनुसार गणेश उत्सव सोमवार को मनाया जा रहा है, जो 10 दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार बप्पा का विसर्जन पहले करना चाहें, तो विधिवत पूजन और आरती के बाद बप्पा को विदा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया की दस दिनों में गणपति की अलग-अलग रूपों में पूजा होती है। पहले दिन गणाधिप, दूसरे दिन उमा पुत्र, तीसरे दिन अघनाशन, चौथे दिन विनायक, पांचवें दिन ईश पुत्र, छठे दिन सर्वसिद्धि प्रदायक, सातवें दिन एकदंत, आठवें दिन इभवक्र, नौवें दिन मूषक वाहन और दसवें दिन कुमार गुरु के रूप में गणपति पूजा होती है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा का दर्शन न करने की भी धार्मिक मान्यता है।
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बप्पा के आगमन से बदलता है घर का वातावरण
गणेश जी के आगमन से घर का वातावरण सकारात्मकता और पवित्रता से भर जाता है। माना जाता है कि इस दौरान हर घर में खुशहाली और शांति का संचार होता है लेकिन साथ ही कुछ नियमों और परंपराओं का पालन करना भी जरूरी है, ताकि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। गणपति स्थापना से लेकर विसर्जन तक घर का माहौल शांतिपूर्ण और सात्विक बनाए रखना चाहिए। इस दौरान क्रोध, झगड़े और कलह से बचें।
सात्विक आहार रखने की सलाह
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालु सात्विक आहार और शुद्ध आचरण का पालन करते हैं। इस दौरान लहसुन-प्याज, मांसाहार और नशीले पदार्थों से परहेज करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।