संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिलेभर में बुधवार को शिवरात्रि पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ पड़ेे। प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, प्रताप गेट स्थित काली माता मंदिर, हनुमान वाटिका का शिव मंदिर, सूरजकुंड, शिव शक्ति धाम और ढांड रोड स्थित शिव मंदिरों में भोर से ही बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया। महिलाओं और पुरुषों ने व्रत रखकर पूरे दिन भगवान शिव की आराधना की। मंदिरों में जगह-जगह भंडारे और प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
शिव वाटिका में हवन और भंडारे का आयोजन ः पाडला रोड स्थित शिव वाटिका में शिवरात्रि पर्व को बड़े उत्साह से मनाया गया। प्रधान कृष्ण नारंग की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में हवन के मुख्य यजमान समाजसेवी अमरजीत छाबड़ा, विन्नी छाबड़ा, भारत भूषण सतीजा सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।
श्री गीता भवन प्रधान कैलाश भगत, कमल आहूजा, इन्द्रजीत सरदाना, बिशम्बर अरोड़ा, महेन्द्र मक्कड़, प्रवीण खुराना, सुरेश अलावादी, वेद नरूला, विनय आदि पहुंचे। कृष्ण नारंग ने बताया कि त्रयोदशी के संध्या काल में शिव पूजन और जलाभिषेक विशेष फलदायी माना गया है।
पाई क्षेत्र के मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब ः पाई और आसपास के गांवों—करोड़ा, भाना, सिसला, सोंगल आदि में शिवरात्रि पर्व भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, माता काली मंदिर और बाबा बिशनदास पुरी मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया।
हरिद्वार से कांवड़ लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, आक, धतूरा, शहद, फल-फूल अर्पित कर पूजन किया और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। मंदिरों में हवन और भंडारे भी आयोजित किए गए।
राजौंद में शिवमय हुआ नगर ः राजौंद। नगर व आसपास के गांवों में शिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। दुर्गा मंदिर स्थित शिव मंदिर में दिनभर जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। पुजारी रामपाल कौशल ने बताया कि इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से सोलह सोमवार के व्रत के बराबर पुण्य मिलता है। जाखौली, किठाना आदि गांवों के शिवालयों में भी भक्तों की भीड़ देखने को मिली।
रंग-बिरंगी पोशाकों में कांवड़िये, गुलाल से किया स्वागत ः डाक कांवड़ लेकर आए शिव भक्तों के नगर आगमन पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। रंग-बिरंगी पोशाकों में ढोल की थाप पर थिरकते कांवड़िए पूरे शहर को शिवमय बना गए। 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुंचे भक्तों ने अभिषेक कर स्वयं को धन्य महसूस किया। बच्चों से बुज़ुर्ग तक सेवा कार्यों में लगे रहे। झूला और डाक कांवड़ लेकर आए भक्तों के प्रति लोगों में श्रद्धा दिखाई दी।