संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक की छह मंडी सचिवों पर चार्जशीट की कार्रवाई करने की कार्रवाई ने धान घोटाले पर मोहर लगाने का काम किया है। अधिकारियों ने अलग-अलग आईपी एड्रेस से गेटपास काटने का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की है।
दूसरी ओर नाराज किसानों और विभिन्न संगठनों का आरोप है कि निजी स्वार्थ में फर्जी गेटपास काटकर घोटाले को अंजाम दिया गया और अब इसे खानापूर्ति की कार्रवाई से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों के अनुसार इस खेल में खरीद एजेंसी अधिकारियों की भूमिका भी अहम है, क्योंकि गेटपास कटने के बाद धान खरीद सरकारी एजेंसी ही करती है और खरीदे गए धान को संबंधित राइस मिल में भेजने के लिए आउटिंग के गेटपास खरीद एजेंसी के निरीक्षक जारी करते हैं।
कैथल मार्केट कमेटी के सचिव नरेंद्र ढुल (कैथल), सतबीर राविश (चीका), देवेंद्र मोर (ढांड), बलवान सिंह (कलायत), गुलाब सिंह (पूंडरी) और मंजीत सिंह (सीवन) पर चार्जशीट की कार्रवाई की गई है। मुख्य प्रशासक मुकेश आहूजा का कहना है कि जांच अभी जारी है और लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अन्य जिलों की तर्ज पर कार्रवाई क्यों नहीं? : कैथल के साथ लगते जिले करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में भी फर्जी गेटपास काटने समेत अन्य अनियमितताएं सामने आई हैं। वहां मंडी सचिव, राइस मिलर और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षकों को निलंबित कर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। कैथल में भी गेटपास में गड़बड़ी सामने आई है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर लीपापोती की जा रही है। अन्य जिलों की तर्ज पर कार्रवाई न करना घोटाले को दबाने की ओर इशारा करता है।
भाकियू का आरोप ः करोड़ों का हुआ घोटाला
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना का कहना है कि गत वर्ष की तुलना में पीआर का प्रति एकड़ 10-15 क्विंटल कम झाड़ निकला, जबकि मंडियों में आवक करीब एक लाख एमटी ज्यादा हुई। पूरे खेल में खरीद एजेंसी, मंडी सचिव, आढ़ती और पंजीकृत राइस मिलर शामिल हैं। कागजों में ही धान खरीदा गया और फर्जी गेटपास काटे गए। अब यह सामने आ चुका है, लेकिन कार्रवाई में लीपापोती कर घोटाले को दबाया जा रहा है। मामले मंे आरोपियों पर निलंबन के साथ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।