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गुरुभक्ति से संभव है ईश्वर की प्राप्ति : स्वामी परमानंद

Mon, 12 Jan 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। दिव्या ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से गुर्जर धर्मशाला, सीवन गेट के समीप नीलम गैस एजेंसी के पास ‘हे साधको’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वामी परमानंद ने प्रवचनों के माध्यम से मनुष्य जीवन में गुरु भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
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स्वामी परमानंद ने कहा कि मनुष्य जन्म ईश्वर की भक्ति और सेवा के लिए प्राप्त होता है, लेकिन ईश्वर की प्राप्ति स्वयं के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए एक सतगुरु की नितांत आवश्यकता होती है, जो साधक को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनता है। उन्होंने कहा कि यह परमात्मा द्वारा स्थापित एक अटल नियम है, जिसे टाला नहीं जा सकता।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब स्वयं परमात्मा ने साकार रूप में इस संसार में अवतार लिया, तब भी उन्होंने गुरु परंपरा का पालन किया। भगवान श्रीराम गुरु वशिष्ठ की शरण में गए और श्रीकृष्ण ने ऋषि दुर्वासा से ज्ञान दीक्षा प्राप्त की तथा गुरु भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। स्वामी ने कहा कि आज लोग इन अवतारों की पूजा तो करते हैं, लेकिन उनके आचरण से शिक्षा नहीं लेते। तीनों लोकों के नायकों ने यह संदेश दिया कि गुरु के बिना मुक्ति संभव नहीं है।
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उन्होंने गुरु की तुलना मूर्तिकार से करते हुए कहा कि जैसे मूर्तिकार अनगढ़ पत्थर से सुंदर और पूजनीय मूर्ति गढ़ देता है, उसी प्रकार गुरु साधक के जीवन को गढ़कर उसे श्रेष्ठ बनाता है। ऐसे ब्रह्मनिष्ठ गुरु की प्राप्ति से मानव जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों के अनुसार पूर्ण गुरु की आज्ञा में रहकर सेवा करने से साधक अपने जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। संवाद
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