कैथल। जूडो कैथल के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य का रास्ता बन चुका है। छोटू राम इंडोर स्टेडियम में हर दिन करीब 100 खिलाड़ी पसीना बहाते हैं।
अब तक 25 से ज्यादा राष्ट्रीय पदक जिले की झोली में आ चुके हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूडो खिलाड़ी सिमरन चार से पांच पदक जीतकर देश और जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं। जूडो ने केवल खिलाड़ियों को पदक ही नहीं दिलाए बल्कि उनके जीवन की दिशा भी बदल दी है। जिले के 50 से 60 खिलाड़ी खेल कोटे के माध्यम से सरकारी नौकरियां हासिल कर चुके हैं। कोई सेना में देश की सेवा कर रहा है तो कई खिलाड़ी ग्रुप-सी और ग्रुप-डी की सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।
इन युवाओं की सफलता अब गांव और जिले के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है। अभिभावक भी अपने बच्चों को खेलों की ओर बढ़-चढ़कर भेज रहे हैं।
जूडो कोच जोगिंद्र, डीपीई संदीप कुमार और पीटीआई मनोज कुमार का कहना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और रोजगार का सबसे मजबूत आधार भी बन रहा है। जिस तरह पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां मिली हैं, उससे युवाओं का रुझान तेजी से खेलों की ओर बढ़ा है। आने वाले समय में कैथल के और भी खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे।
जूडो का अभ्यास करते खिलाड़ी।