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Kaithal News: कवि हरिकेश की जयंती पर कलाकारों का सम्मान

Tue, 22 Aug 2023 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कलायत। हरियाणा कला परिषद व संस्कार एवं संस्कृति प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को गांव धनौरी के विख्यात कवि स्व. हरिकेश पटवारी की जयंती मनाई गई। इस मौके पर कई कलाकारों को सम्मानित किया गया।
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गांव कोयल में आयोजित भव्य सांस्कृतिक में मुख्यातिथि के तौर पर अतिरिक्त निदेशक हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल नागेंद्र शर्मा ने शिरकत की। समारोह में पहुंचने पर उनका युवा समाजसेवी संपूर्ण कोयल, महिला सरपंच कविता देवी, कपिल धनौरी और युवा समिति धनौरी की अगुवाई में ग्रामीण परंपरा के मुताबिक मुख्य अतिथि के साथ कलाकारों का अभिनंदन किया।

इस मौके पर अतिरिक्त निदेशक ने कहा कि हरियाणा कला परिषद हर स्तर पर हरियाणवी संस्कृति के प्रचार-प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ रही। कवियों की समितियों की अनुशंसा पर कला परिषद द्वारा सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में देश के नामी कवि हरिकेश पटवारी की जयंती आयोजित करने का निर्णय लिया। कार्यक्रम में मौजूद हरिकेश पटवारी के पौत्र प्रवीण शर्मा ने बताया कि उनके दादा सुप्रसिद्ध कवि के साथ साथ रेडियो गायक भी रहे। इसके साथ ही उनके द्वारा लिखी गई रचनाएं विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही हैं।
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इस अवसर पर हरियाणवी गायक बलवीर शर्मा देवबन, रागिनी गायक बलदेव तितरम, डा.लोकेश शर्मा, लोक गायक विकास निडाना, गायक अनिल रूहल, सुरेश भाणा, सतीश ढीग, कमल हरिपुरा, रमेश ढांडा व टेक चंद धनौरी ने हरिकेश पटवारी की रागनियां प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. सतीश चंदाना और डा. सतीश पराशर ने किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा प्रदेश अध्यक्ष कर्मबीर खुराना, बलजीत सिंह, युवा संगठन धनौरी के प्रधान सोनू ढांडा और विभिन्न संगठनों के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अंग्रेजी हुकूमत की बिना परवाह किए कवि हरिकेश जगाते थे आजादी की लौ

अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान भारत में सात अगस्त 1898 को जन्मे गांव धनौरी के आशु कवि हरिकेश पटवारी अंग्रेजी हुकूमत की परवाह किए बिना अपनी कलम व मधुर आवाज से देशवासियों में आजादी की लौ जगाने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी की झलक, वैराग्य रत्न माला, प्रश्नोत्तरी, हरिकेश पुष्पांजलि जैसी रचनाएँ व स्नातक कक्षाओं में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में उनकी बेजोड़ लेखनी का बड़ा बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलता है।

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी उनसे बेहद प्रभावित रहें। वर्ष 1952 में जींद के नरवाना में कवि से उन्होंने मुलाकात की थी। आजादी के लिए तराना छेड़ने में अहम भूमिका अदा करने पर प्रधानमंत्री ने कवि हरिकेश को 5 हजार रुपए बतौर इनाम व उपहार स्वरूप पिस्तौल भेंट की थी। संवाद
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