इलाहाबाद से छुट्टी लेकर घर आ रहे सेना के जवान राजीव की कार के सामने अचानक गाय आने से अनियंत्रित हुई कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और हादसे में जवान की मौत हो गई।
छह माह बाद छुट्टी लेकर घर आ रहे जनकपुरी कालोनी निवासी राजीव कुछ ही लम्हों के बाद परिजनों से मिलने वाले थे और अपनी दो बेटियों को गोद में उठाकर दुलार करने वाले थे, लेकिन कैथल जिले में प्रवेश करने से पहले ही कैथल-पानीपत मार्ग पर असंध के निकट हुए सड़क हादसे में राजीव की मौत हो गई। परिजनों में इस हादसे के कारण शोक की लहर दौड़ पड़ी। अंबाला से आई आर्मी की टुकड़ी ने अंतिम संस्कार से पहले जवान को सलामी दी। अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हादसे में जान गंवाने वाले जवान का पूरा परिवार आर्मी से जुड़ा हुआ है।
जनकपुरी कालोनी निवासी 27 वर्षीय राजीव आर्मी में इलाहाबाद में तैनात थे। भाई राहुल सिंह ने बताया कि उनका छोटा भाई राजीव सिंह आठ वर्ष पहले सेना में भर्ती हुआ था। इस समय वह इलाहाबाद में 81 मीडियम रेजीमेंट में लांस नायक के पद पर था। कुछ दिन से उसकी पत्नी बीमार थी, इसलिए वह इमरजेंसी छुट्टी लेकर अपने घर आ रहा था। कोरोना के कारण सरकार वाहनों की सुविधा कम होने के चलते वह अपने किसी दोस्त की प्राइवेट कार में सवार होकर घर आ रहा था। जब वे गांव रोहड़ के पास पहुंचे तो गाय को बचाने के चक्कर में उनकी कार पलट गई। इस दुर्घटना में राजीव सिंह की मौत हो गई जबकि गाड़ी में सवार दूसरा व्यक्ति घायल हो गया। उन्हें सूचना मिली तो वे मौके पर पहुंचे। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी। सूचना मिलने पर अंबाला से आई आर्मी की टुकड़ी ने उसे सलामी दी। सैनिक के अंतिम संस्कार में 1812 रॉकेट रेजीमेंट अंबाला कैंट से नायब सूबेदार रतनाकर पाल, हवलदार आरएस राठी, लांस नायक विवेक व टीए रवि सलारिया शामिल हुए। इसके अलावा शहर के गणमान्य लोगों ने भी अंतिम संस्कार में शामिल होकर सैनिक को नमन किया।
राहुल ने बताया कि उनका पूरा परिवार सेना से जुड़ा हुआ है। उनके पिता कृष्ण लाल भी आर्मी से सूबेदार रिटायर्ड हैं। वह खुद भी सेना में हवलदार क्लर्क है। छोटा भाई सागर भी पढ़ाई के साथ-साथ आर्मी में भर्ती के लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजीव शादीशुदा था। उसकी दो बेटियां भी हैं। उनमें से एक चार साल की है और दूसरा डेढ़ साल की है। मंगलवार शाम को राजीव सिंह इलाहाबाद से कैथल के लिए चला था। पहले वह लेह लद्दाख में भी तैनात रह चुका है। सेवानिवृत्त कैप्टन बलजीत मोर ने कहा कि बहुत ही दुख भरी घटना है। सैनिकों, समाज के लिए दुखद हादसा है। देश की सेना का जवान एक हादसे में चला गया। जिसकी भरपाई करना बहुत ही मुश्किल है।