संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर विश्व हिंदू परिषद ने श्रद्धा से धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। सबसे पहले रामलला का पंचामृत के साथ स्नान करवाया गया। फिर सामूहिक राम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा पाठ के बाद भगवान राम की आरती की गई।
कार्यक्रम में विहिप कि जिला उपाध्यक्ष बीरभान निर्मल, जिला सहमंत्री निशीकांत शर्मा, प्रखंड अध्यक्ष संजय सिंगला, प्रखंड मंत्री डाॅ. प्रियव्रत गालब, प्रखंड धर्माचार्य पंडित विशाल शांडिल्य, पूर्व अध्यक्ष राजू कौशिक, अनुराधा शर्मा, सरोज सिंगला आदि मौजूद रहीं।
निर्मल ने कहा कि 11 जनवरी 2025 को रामलला प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्ष गांठ मनाई जा रही है। जबकि पिछले साल 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। उन्होंने बताया कि आयोजन की वर्षगांठ हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जा रही है। पिछले साल 22 जनवरी को जो मुहूर्त था उसके अनुसार इस वर्ष प्रतिष्ठा द्वादशी 11 जनवरी को है। इसलिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस वर्ष 11 से 13 जनवरी तक उत्सव मनाने का निर्णय लिया है।
निशीकांत शर्मा ने कहा कि राम शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण। राम कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है जो हमे आत्मिक शांति देती है। हिन्दू धर्म के चार आधार स्तंभों में से एक है प्रभु श्रीराम। भगवान श्री राम ने एक आदर्श चरित्र प्रस्तुत कर समाज को एक सूत्र में बांधा था। भारत की आत्मा है प्रभु श्रीराम। प्रभु श्रीराम ने वन में बहुत ही सादगीभरा तपस्वी का जीवन जिया। अपने बनवास के दौरान उन्होंने राजा महाराजाओं से नहीं मिले।
उन्होंने वनवासी और आदिवासियों के अलावा निषाद, वानर, मतंग और रीछ समाज के लोगों के बीच रहे और उनको धर्म, कर्म और वेदों की शिक्षा दी। वन में रहकर उन्होंने वनवासी और आदिवासियों को धनुष एवं बाण बनाना सिखाया, तन पर कपड़े पहनना सिखाया, गुफाओं का उपयोग रहने के लिए कैसे करें, ये बताया और धर्म के मार्ग पर चलकर अपने रीति-रिवाज कैसे संपन्न करें, यह भी बताया। उन्होंने आदिवासियों के बीच परिवार की धारणा का भी विकास किया। डा.प्रियव्रत ने कहा कि देशवासियों ने हमारी संस्कृति व अध्यात्म की इस महान धरोहर को लेकर सदियों तक त्याग, संघर्ष व तपस्या की। सदियों की तपस्या के बाद रामलला साक्षात अयोध्या में विराजमान हैं और हम उनकी प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ मना रहे हैं।