अंकित ने बताया कि वह बेरोजगार है और कुछ महीने पहले ही डंकी के रास्ते ही अमेरिका में अच्छा रुपया कमाने के लिए गया था। वह सात महीने पहले ही अमेरिका के लिए गया था। उसने अमेरिका जाने के लिए करीब 45 लाख रुपये खर्च किए। एजेंसी ने 40 दिन में अमेरिका भेजने का वायदा किया, लेकिन छह महीने में वहां पहुंचा। मैकिस्कों बॉर्डर पर करीब पांच महीने तक रहा। पहाड़ों पर चढ़कर बॉर्डर को क्रॉस किया था।
पहाड़ों को पार करके 15 किलोमीटर तक पैदल गया गया। पहले जो लोग अमेरिका जाते थे, उनके साथ अच्छा व्यवहार करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जब वह अमेरिका पहुंचा तो वहां पर हस्ताक्षर करवा लिया। इस दौरान आपराधियों की तरह व्यवहार किया है। जब डिपोर्ट करना तो न महिला पर तरस खाया और न ही बच्चों पर। वहां से हथकड़ियां लगा दी। एयरफोर्स के जहाज लैंड होने से 30 मिनट पहले ही केवल महिला हथकड़िया खोली थी। पूरी यात्रा के दौरान बिल्कुल आपराधियों की तरह ही देखा है।
धुंधरेहड़ी निवासी साहिल के चाचा ने बताया कि अमेरिका के लिए साहिल पिछले साल मई में गया था। इसके बाद करीब छह महीने तक दुबई गया था। इसके बाद वह करीब 22 दिन पहले ही अमेरिका गया था। अब उसे बुधवार को ही अमृतसर डिपोर्ट किया गया था। देर रात में वह घर पहुंचा है। कहा कि करीब 50 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका गया था। यह रुपया ब्याज पर लेकर साहिल अमेरिका के लिए गया था। अब ब्याज पर लिया गया रुपया उतारना बेहद मुश्किल होगा। अब वे भय के माहौल में जी रहे हैं। इतना लाखों रुपये कर्ज कैसे उतारेंगे।
धुंधरेहड़ी निवासी साहिल के भाई ने बताया कि पंजाब पुलिस के जवान सुबह उसे घर छोड़कर गए। उन्होंने कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और फिर साहिल की फोटो लेकर वापस लौट गए,लेकिन इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी न तो जिला प्रशासन को दी गई और न ही स्थानीय पुलिस को। बताया कि भाई को हथकड़ियों में लेकर पुलिस आई थी। इसे हरियाणा में प्रवेश करने के बाद निकाला गया। साहिल सात महीने पहले अमेरिका के लिए घर से गया था, जिसको वहां पहुंचने छह महीने से अधिक का समय लगा, वह अभी 15 दिन से जेल में ही बंद था, उसे कोई कानूनी अधिकार का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।
मानसिक तनाव में है भाई
साहिल के भाई ने बताया कि मानसिक तनाव में हैं और घर जाने की बजाय दोस्तों और रिश्तेदारों के पास समय बिता रहे हैं। इनमें से चार युवाओं को पंजाब पुलिस ने उनके गांवों तक छोड़ा, लेकिन जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका सरकार की ओर से डिपोर्ट किए गए भारतीयों में हरियाणा के 34 लोगों में से सबसे अधिक लोक कैथल के निवासी हैं। ऐसे में वीरवार को भारतीय को डिपोर्ट करने पर लोगों ने प्रदर्शन किया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जलाए गए। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता गुरप्रीत सैनी ने ट्रंप की जीत पर कैथल में पोस्टर लगाए थे। गुरप्रीत सैनी ने अमेरिका सरकार की ओर से डिपोर्ट किए गए भारतीयों को हथकड़ी लगाने पर रोष जताया।
बता दें कि गुरप्रीत सैनी ने पोस्टरों के माध्यम से संदेश दिया था कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती से भारत-अमेरिका के रिश्ते मजबूत होंगे और भारतीयों को फायदा होगा, लेकिन अब ट्रंप सरकार ने भारतीयों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू की है। सैनी ने इस मामले पर दुख जताते हुए कहा कि अमेरिका में ट्रंप की जीत पर मैंने पोस्टर लगाए थे, लेकिन अब जब प्रदेश के 34 और कैथल के 11 युवा डिपोर्ट कर दिए गए। यह बेहद निदंनीय है। क्योंकि कैथल के युवा भी 40 से 50 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन उन्हें अपराधियों की तरह हाथ व पैरों में हथकड़ियां लगाकर वापस भेजा। यह बहुत गलत है।