निशीकांत शर्मा
कलायत। कुरुक्षेत्र रोड चौक कैथल में गत 20 जुलाई सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा अनावरण के मामले में राजपूत समाज ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर आंदोलन को गति दी है। प्रतिमा के अनावरण विवाद के बाद पहली बैठक में ही राजपूत समाज ने लंबे समय तक अपना आंदोलन करने की रणनीति बना ली थी। इसी कड़ी में सबसे पहले कलायत में यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
उल्लेखनीय है कि राजपूत समाज अनावरण होने वाली इस प्रतिमा पर हिंदू सम्राट मिहिर भोज अंकित करवाने का पक्षधर था। इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं व प्रशासन के बीच काफी लंबी बातचीत भी हुईं। प्रशासन की और से आपसी सौहार्द बना कर मामला
निपटाने की बात भी कही परंतु अनावरण से एक दिन पहले राजपूत समाज के लोगों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी।
अगले दिन बिना किसी बदलाव के आनन-फानन में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की पट्टिका के साथ समय से पूर्व अनावरण भी कर दिया गया। इसके चलते पूरे प्रदेश का राजपूत समाज लामबंद हो गया। मामले को लेकर मुढाड राज्य की राजधानी रहे कलायत में लगातार बैठकों का दौर चलता रहा और निर्णय लिए। इसके अनुसार ही शुक्रवार को कलायत में राजपूत समाज ने प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन धरने की शुरूआत कर दी। धरने के संयोजक सलिंद्र राणा ने कहा कि इस धरने में प्रतिदिन अलग अलग स्थानों से राजपूत प्रतिनिधि शामिल हो कर अपनी प्रतिभागिता दर्ज करवाएंगे। संवाद
यूं चला विवाद शुरू होने के बाद घटनाक्रम
21 जुलाई को हरियाणा व आसपास के प्रदेश से राजपूत समाज के हजारों प्रतिनिधि एकत्रित हुए और भाजपा सरकार के खिलाफ कठोर निर्णय लिए। सबसे पहले तो कलायत उपमंडल के जिन राजपूत नेताओं के पास भाजपा के पदों के दायित्व थे उन सभी ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र देते हुए पार्टी को छोड़ने का एलान कर दिया था। कलायत मंडल के अध्यक्ष महीपाल राणा, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष जयदीप राणा व किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष संजीव राणा ने सारे प्रकरण के लिए जिलाध्यक्ष अशोक गुर्जर को उत्तरदायी ठहराया। इन लोगों का कहना था जिलाध्यक्ष ने राजपूत समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। प्रतिमा पर गुज्जर शब्द की जगह वे लोग हिंदू सम्राट लिखवाने के लिए लगातार पार्टी के जिलाध्यक्ष से संवाद कर रहे थे। जिलाध्यक्ष ने उन लोगों को अंधेरे में रखा व प्रशासन पर दबाव बना कर मामले में सामंजस्य बनने ही नहीं दिया।
22 जुलाई को हुई बैठक में राजपूत समाज के लोगों में सत्तारूढ़ भाजपा को लेकर काफी रोष था। जिसके चलते आने वाले चुनावों में भाजपा का विरोध करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया।
29 जुलाई को हुई बैठक में राजपूत समाज के पदाधिकारियों ने बड़ा एलान किया कि राजपूत बहुल 1300 गांवों में भाजपा के किसी भी नेता, विधायक या मंत्री को नहीं घुसने दिया जाएगा।
10 अगस्त को हुई बैठक में हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि प्रदेशों से आए राजपूत प्रतिनिधियों ने राजपूत समाज की प्रदेश स्तरीय 15 सदस्यीय समिति द्वारा तय पांच सूत्री मांगों के सिरे चढऩे तक हर स्तर पर सरकार के विरोध का फैसला लिया।
25 अगस्त को कलायत में अनिश्चिकालीन धरना शुरू किया है।
क्या है विवाद
ढांड रोड स्थित चौक पर लगी सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के आगे जातिसूचक गुर्जर शब्द लिखने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया था। फिर विरोध में लघु सचिवालय में नारेबाजी की थी। गुर्जर समाज की ओर से कहा गया था कि मामला न्यायालय पहुंच गया है इसलिए वे अब उसके आदेशों का ही पालन करेंगे।