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सरकारी स्कूलों में लगातार घट रहे बच्चों के मामले में गुहणा का प्राइमरी स्कूल बना उदहारण

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शिक्षा विभाग जहां बच्चों की संख्या कम होने के कारण प्राइमरी स्कूलों को बंद कर रहा है। वहीं गांव गुहणा का प्राथमिक विद्यालय इस संबंध में उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यहां बच्चों की संख्या कम होने की बजाए लगातार बढ़ रही है। स्थिति यह है कि स्कूल के अध्यापकों के बच्चे भी यहीं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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स्कूल इंचार्ज महेंद्र सिंह ने बताया कि स्कूल में वाटर कूलर, बिजली जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बच्चों को स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाया जाता है। जिले में ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या इसी स्कूल में है। साल 2016 में जहां विद्यार्थियों की संख्या 302 थी। अब यह 365 हो गई। यहां 13 स्टाफ सदस्य हैं। स्कूल में कार्यरत अध्यापकों के 10 बच्चे भी इसी स्कूल में पढ़ाई करते हैं। सरकारी विद्यालय में प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर खेल मैदान की भी सुविधा है, जहां अनेकों प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
स्कूल में कार्यरत अध्यापक प्रीतम सिंह ने कहा कि वे 2016 से इसी स्कूल में कार्यरत हैं। उनके दो बच्चे हैं, जो इसी स्कूल में पढ़ते हैं। उनका बेटा चौथी में और बेटी नर्सरी में है। उन्होंने कहा कि उनकी शुरू से इच्छा थी कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना है और अच्छी शिक्षा दिलवानी है। सभी विद्यालयों में शिक्षा एक ही होती है, लेकिन शिक्षकों को भी इसमें रुचि लेनी चाहिए। अगर सभी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे तो वास्तव में सरकारी विद्यालय की तस्वीर बदल जाएगी। इसी स्कूल में पढ़ा रहे जेबीटी अध्यापक सूरज, अशोक व कपिल के बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ते हैं। वहीं इसी स्कूल में जेबीटी अध्यापिका नीलम के भी दो बच्चे पढ़ते हैं।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी दलीप सिंह ने कहा कि यह एक अच्छा उदाहरण है। सरकारी स्कूल के अध्यापकों ने मिसाल कायम की है। पूरे जिले में प्रयास किया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाई जाए। इस विद्यालय में बढ़ी हुई बच्चों की संख्या अध्यापकों द्वारा चलाई गई मुहिम का परिणाम है।
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