स्वास्थ्य विभाग की सेवा 102 यानि के एंबुलेंस सेवा मरीजों की संख्या के सामने बेदम साबित हो रही है। एंबुलेंस की कमी के चलते मरीजों को कई बार परेशानी होती है। काफी बार प्राइवेट एंबुलेंस करके लोगों को अपना काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में प्राइवेट वाहन चालक भी लोगों से मनचाही राशि वसूल रहे हैं। हालांकि अस्पतालों में यह समस्या पहले से ही रही है, लेकिन कोरोना काल में समस्या और ज्यादा बढ़ गई है।
16 में से चार अंडर सर्विस और चार लगी कोरोना बचाव में-इस समय जिला नागरिक अस्पताल सहित विभिन्न सीएचसी में 16 एंबुलेंस गाड़ियां हैं। इनमें से चार गाड़ियां अंडर सर्विस हैं। चार को कोरोना से बचाव के प्रबंधों में लगाया गया है। इनके अलावा एक-एक एंबुलेंस पूंडरी, चीका, सीवन, कलायत, राजौंद व कौल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगाई गई हैं। ऐसे में नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा लोगों को समय पर नहीं मिल पा रही है।
करीब 10 एंबुलेंस की और जरूरत
अस्पताल से छुट्टी लेकर जाने वाले मरीजों और यहां दाखिल होने वालों की प्रतिदिन की संख्या को देखते हुए जिले में कम से कम 10 एंबुलेंस की और जरूरत है। कई बार तो एंबुलेंस कक्ष में भी कर्मचारियों के पास मरीजों के परिजनों की काफी आवाजाही रहती है। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा भी विवशता के चलते लोगों को कुछ समय इंतजार करने के लिए कहा जाता है। जब तक एक व्यक्ति को सुविधा मिलती है, तब तक कई अन्य भी वहां सुविधा के लिए आ जाते हैं और मरीज की जानकारी व फोन नंबर दर्ज करवा चुके होते हैं।
एंबुलेंस सेवा के फ्लीट मैनेजर सुभाष ने कहा कि एंबुलेंस गाड़ियों के लिए डिमांड भेजी हुई है। जैसे ही नई गाड़ियां मिल जाएंगी, उसी अनुसार उनसे काम लेना शुरू कर दिया जाएगा। इस समय उपलब्ध गाड़ियों से काम चलाया जा रहा है। यदि गाड़ी मरीज लेने या छोड़ने गई हुई है तो नए मरीज को इंतजार करने के लिए कहा जाता है। गाड़ियां ओर मिल जाएं तो बेहतर है।
सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाटान ने बताया कि एंबुलेंस की कमी के बारे में स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। करीब आठ नई एंबुलेंस की मांग की गई है। वहीं निजी एंबुलेंस का भी लोगों की सुविधा के लिए सहयोग लिया जा रहा है। जिले में विभाग द्वारा लोगों को हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।