पिछले सप्ताह एंबुलेंस में हुई मासूम बच्चे की मौत के मामले में डीसी डा. प्रियंका सोनी ने संज्ञान लिया है। डीसी ने मामले की जांच एडीसी कैथल वीना हुड्डा को सौंपी है। डीसी का कहना है कि एडीसी की रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर बच्चे की मौत के बाद सिविल सर्जन डा. सुरेंद्र नैन ने जिला अस्पताल परिसर के अंदर व आस-पास के एरिया में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सभी प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला अस्पताल में एंबुलेंस खड़ा नहीं करेंगे।
बच्चे की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग : जिला अस्पताल में इमरजेंसी के सामने प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी रहती थीं। इसके अलावा बाहर भी काफी संख्या में प्राइवेट एंबुलेंस गेट व आस-पास खड़ी रहती थीं। समाजसेवी राजू डोहर ने बताया कि उन्होंने इस मामले में डीसी को शिकायत भी की थी। इसके बाद एंबुलेंस कुछ दूर खड़ा करना शुरू कर दिया गया था। लेकिन स्थिति फिर से वही हो गई थी। इसी लापरवाही का नतीजा है कि प्राइवेट एंबुलेंस पर शहर में किसी का नियंत्रण नहीं हैं और एक मासूम बच्चे को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन ने कहा कि जिला अस्पताल के अंदर किसी भी एंबुलेंस को खड़ा नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल से दूर उन्हें अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए कहा गया है। अस्पताल के अंदर केवल सरकारी एंबुलेंस की गाड़ियां खड़ी होंगी।
डीसी डा. प्रियंका सोनी ने कहा कि इस मामले में एडीसी को जांच सौंपी गई है। पहले पता लगाया जाएगा कि किस की कमी है। इसके बाद ही अगली कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी पता करवाया जाएगा कि प्राइवेट एंबुलेंस की इंक्वॉयरी कौन और किस तरह से करता है।